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लॉकडाउन न लागू कर स्वीडन ने मोल लिया बड़ा खतरा, दर्ज की गई विश्व में सर्वाधिक मृत्यु दर

Thu, 04 Jun 2020 06:26 PM IST
अंशुल तलमले वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सोर्स: Analysis of European centre for disease prevention and control data - फोटो : ट्विटर
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स्वीडन एक बार फिर चर्चाओं में है। पहले लॉकडाउन में ढील की वजह से सुर्खियों में था अब उससे बढ़े कोरोना संक्रमण की वजह से खबरों में है। एक करोड़ की आबादी वाले इस छोटे से उत्तर यूरोपीय देश ने कोविड-19 को लेकर विचित्र रणनीति बनाई थी। नाम मात्र का लॉकडाउन लागू किया गया। प्राइमरी स्कूल खुले रहे। बार और रेस्त्रां में लोगों की पूरी चहल-पहल दिखी। पार्क में नागरिक टलहते रहे। सरकार की ओर से उन तमाम गाइडलाइंस का मखौल उड़ाया गया जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी किए गए थे, अब इसका पछतावा खुद वहां के नीति निर्माताओं को हो रहा है।

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'लॉकडाउन नहीं करना सबसे बड़ी भूल'

स्वीडन के स्टेट एपिडेमियोलॉजिस्ट और कोरोना मामलों की रिस्पॉन्स टीम के प्रमुख एंडर्स टेगनेल - फोटो : ट्विटर
स्वीडन के शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञ एंडर्स टेगनेल ने इशारों में यह मान लिया है कि उन्होंने देश में लॉकडाउन नहीं करने की सलाह देकर बड़ी गलती की है। इस गलती से कोरोना के मामले बढ़े और इससे कई मौतें हुईं। दरअसल, पिछले एक महीने में दो हफ्ते ऐसा भी हुआ, जब स्वीडन में कोरोना से मौतों की दर दुनिया में सबसे ज्यादा रही। टेगनेल स्वीडन के स्टेट एपिडेमियोलॉजिस्ट और कोरोना मामलों की रिस्पॉन्स टीम के प्रमुख हैं। टेगनेल ने स्वीडिश रेडियो को दिए इंटरव्यू में कहा कि कोरोना को लेकर दुनिया ने जो किया और हमने जो किया, उस पर विचार करेंगे। हमने जो भी किया, उसमें बहुत सुधार की जरूरत है। टेगनेल ने अप्रैल में कहा था कि कोरोना से ज्यादा मौतें घर में रहने के कारण होगी क्योंकि वहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो सकता।

3 जून को एक दिन में मिले सर्वाधिक 2214 मामले 

स्वीडन में कोरोना के मरीजों का बढ़ता ग्राफ - फोटो : वर्ल्डोमीटर
जब कोरोना महामारी पूरे यूरोप पर हावी थी तब माना जा रहा था कि स्वीडन में स्थिति काबू में है, लेकिन अप्रैल से स्वीडन में मामले तेजी से बढ़ने लगे। जबकि दूसरे देशों की स्थिति सुधरने लगी थी। स्वीडन में नॉर्वे की तुलना में दोगुनी आबादी है, लेकिन केस की संख्या चौगुनी है। स्वीडन की आबादी करीब एक करोड़ है। यहां कोरोना के 40,803 मामले आए हैं। जबकि इससे 4,542 मौतें हुई हैं। इससे अलग सख्त लॉकडाउन के कारण स्वीडन के अन्य पड़ोसी देश डेनमार्क और फिनलैंड में कम लोग संक्रमित हुए और मौतें भी कम हुईं। 7 मई से स्वीडन में हर दिन केसों में बढ़ोतरी लगातार यूरोप के सर्वाधिक प्रभावित देशों से अधिक बनी हुई है। 3 जून को तो एक दिन में सर्वाधिक 2214 केस दर्ज किए गए।
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अब थम नहीं रहा मौत का सिलसिला

स्वीडन में 4 जून तक रोजाना मौत के आंकड़े - फोटो : वर्ल्डोमीटर
स्वीडन में मौतों का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों की देखभाल के लिए बने केयर होम्स से आया है। 24 मई तक इस देश की दुनिया में कोरोना वायरस से प्रति व्यक्ति मृत्यु दर छठे नंबर पर थी। हर दस लाख पर 384, लेकिन पिछले सात दिनों की बात की जाए तो 322 मौतों के साथ, स्वीडन में रोजाना प्रति व्यक्ति 46 लोगों की मौत हो रही है। एक अन्य वैज्ञानिक ऑनलाइन प्रकाशन Ourworldindata.com के अनुसार, स्वीडन में पिछले सात दिन में प्रति व्यक्ति कोविड-19 मौतों की संख्या 2 जून तक दुनिया में सबसे अधिक थी। देश की कुल आबादी के अनुपात में प्रति दिन 5.29 लोगों की मृत्यु हो रही थी, जिसके बाद ब्रिटेन (4.48) का नंबर था। प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन, जो सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी का नेतृत्व करने वाले एक पूर्व वेल्डर और ट्रेड यूनियनिस्ट हैं, इन मौतों को किस तरह देखते हैं, यह समझने वाली बात होगी क्योंकि उन्हीं की सरकार ने लॉकडाउन को अवैज्ञानिक और निरर्थक उपाय करार दे दिया था। तब स्वीडिश सरकार का कहना था कि, 'लॉकडाउन लोगों की बेहतरी और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है।'
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