ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन देश के शिक्षा विभाग के साथ टकराव की राह पर हैं। दरअसल, ब्रेवरमैन पढ़ाई के बाद वीजा रूट के तहत विदेशी छात्रों के ठहरने की अवधि में कटौती करने की योजना पर विचार कर रही हैं। देश के मीडिया रिपोर्ट्स में बुधवार को यह जानकारी दी गई है।
ब्रेवरमैन की प्रस्तावित समीक्षा के तहत नए ग्रेजुएट वीजा रूट में कटौती की उम्मीद है। समाचार पत्र 'द टाइम्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मूल की गृहमंत्री ब्रेवरमैन ने ग्रेजुएट वीजा रूट में 'सुधार' की योजना तैयार की है। इस योजना के तहत छात्रों को कुशल नौकरी हासिल कर वर्क वीजा लेना होगा या छह महीने बाद ब्रिटेन छोड़ना होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन का शिक्षा विभाग (डीएफई) इन बदलावों को रोकने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि उन्हें इस बात चिंता सता रही है कि इससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों में ब्रिटेन के प्रति होने वाले आकर्षण को नुकसान पहुंचेगा।
ब्रेवरमैन की योजना का समर्थन करने वाले एक सरकारी सूत्र ने कहा, छात्रों द्वारा स्टुडेंट वीजा का कम सम्मानित विश्वविद्यालयों में छोटे पाठ्यक्रमों के लिए तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा था। अखबार ने सूत्र के हवाले से कहा, इसका इस्तेमाल पिछले दरवाजे से आव्रजन (इमिग्रेशन) रूट के तौर पर किया जा रहा है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (ओएनएस) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल विदेशी छात्रों के सबसे बड़े समूह के रूप में भारतीयों ने चीनी को पीछे छोड़ दिया और जुलाई 2021 में शुरू किए गए नए ग्रेजुएट वीजा रूट में भारतीयों का वर्चस्व था, जो दिए गए वीजा का 41 प्रतिशत हिस्सा था।
पिछले हफ्ते प्रकाशित आंकड़ों से पता चला है कि ब्रिटेन में 680,000 विदेशी छात्र थे। सरकार की 2019 की उच्च शिक्षा नीति में 2030 तक 600,000 छात्रों का लक्ष्य शामिल था, जिसे पिछले साल ही पूरा कर लिया गया था। एक अन्य प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है, जिसमें विदेशी छात्रों को आश्रित परिवार के सदस्यों को दो साल के लिए अपने साथ लाने की अनुमति तभी मिलेगी जब वे पीएचडी, या स्नातकोत्तर जैसे शोध-आधारित पाठ्यक्रमों कर रहे होंगे।