शोधकर्ताओं ने बताया कि कोविड-19 के साथ करीब से जुड़े दो वायरस (सार्स और मर्स) ने हमें स्पाइक प्रोटीन के बारे में सिखाया जो वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी पैदा करने में अहम है। इस वैक्सीन को इन शोधकर्ताओं ने पिटकोवैक नाम दिया है। यह वायरल प्रोटीन के प्रयोगशाला में निर्मित टुकड़ों से बनकर प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है जैसा कि फ्लू में होता है।
ऐसे होता है इस्तेमाल
शोधकर्ताओं ने इसका प्रभाव बढ़ाने के लिए दवा देने की नई तकनीक का उपयोग किया उन्होंने उंगली की नोंक के बराबर के 400 बहुत महीन सुइयों का पैच बनाया जो त्वचा में स्पाइक प्रोटीन के टुकड़े इंजेक्ट कर देती है, जहां प्रतिरोधी क्षमता सबसे मजबूत होती है। यह पैच प्लास्टर की तरह चिपकता है और सुइयां त्वचा के अंदर चली जाती है, जो शुगर और प्रोटीन से बनी होती हैं।
दर्द भी नहीं होता
शोध में शामिल रहे त्वचारोग विशेषज्ञ प्रोफेसर लुईस फालो ने बताया, हमने वही स्टार्च पद्धति अपनाई जो स्मॉल पॉक्स के टीके को लगाने के लिए उपयोग की जाती थी। लेकिन यह एक एक हाई टेक संस्करण हैं जो ज्यादा कारगर है और इसे दूसरे मरीजों से भी बनाया जा सकता है और इसमें दर्द भी नहीं होता। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस वैक्सीन को बड़े पैमाने पर बनाया जा सकता है।