ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल श्रीलंका ने 17 जून को एक पीआईएल दाखिल की थी। इसमें दावा किया गया था कि पूर्व राष्ट्रपति गोतााबया राजपक्षे, उनके भाई महिंदा राजपक्षे और बासिल राजपक्षे आर्थिक संकट के लिए सीधे जिम्मेदार हैं।
श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अधिकार समूह की याचिका पर राजपक्षे परिवार के खिलाफ मुकदमा चलाने अनुमति दी है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि देश के विदेशी कर्ज और सबसे खराब आर्थिक संकट के लिए राजपक्षे परिवार सीधे तौर पर जिम्मेदार है।
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ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल श्रीलंका ने 17 जून को एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की थी। इसमें दावा किया गया था कि पूर्व राष्ट्रपति गोतााबया राजपक्षे, उनके भाई महिंदा राजपक्षे और बासिल राजपक्षे, केंद्रीय बैंक के पूर्व गवर्नर अजित निवार्ड काबराल और वित्त मंत्रालय के नौकरशाह एस. आर. अट्टीगले आर्थिक संकट के लिए सीधे जिम्मेदार हैं। अधिकार समूह ने दावा किया है कि ये सभी विदेशी ऋण की अस्थिरता, ऋण भुगतान और वर्तमान आर्थिक संकट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
याचिकाकर्ता के वकीलों ने तर्क दिया था कि राजपक्षे नेतृत्व ने समय पर भुगतान नहीं किया जिसके कारण कारण श्रीलंका दिवालिया हो गया। बाद में घोषणा की कि देश अपनी अंतरराष्ट्रीय ऋण प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में असमर्थ है।
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श्रीलंका की राजनीति में राजपक्षे परिवार का बीते दो दशक से दबदबा कायम था। आर्थिक संकट के कारण देश में हुए व्यापक प्रदर्शनों के बाद सभी भाइयों(गोताबया राजपक्षे, महिंदा राजपक्षे, बासिल राजपक्षे) को अपना पद छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था।
आर्थिक संकट के बीच जनता के विद्रोह के कारण गोताबया राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा था। श्रीलंका लगभग दिवालिया हो चुका है। उसने 51 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्ज चुकाना है। उसे 2027 तक 28 बिलियन अमेरिकी डॉलर चुकाने होंगे।