नकदी संकट से जूझ रहे श्रीलंका के चुनाव आयोग ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से घोषणा की कि स्थानीय निकाय चुनाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 9 मार्च को नहीं होंगे और नई तारीख 3 मार्च को अधिसूचित की जाएगी।
दरअसल, चुनाव कराने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई और इसे मई तक के लिए स्थगित कर दिया। एक दिन बाद शुक्रवार को चुनाव आयोग के अधिकारियों ने आपस में विचार-विमर्श किया और फिर उसके बाद औपचारिक घोषणा की।
चुनाव आयोग अब संसद के स्पीकर महिंदा यापा अभयवर्धने से हस्तक्षेप की मांग करेगा, ताकि चुनाव कराने के लिए कोषागार (ट्रेजरी) से जरूरी धन हासिल किया जा सके। इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि देश के मौजूदा आर्थिक संकट से जुड़े कई कारणों के चलते 9 मार्च को स्थानीय निकाय चुनाव कराना मुश्किल है।
राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने गुरुवार को जोर देकर कहा था कि उनका काम संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना है। उन्होंने संकेत दिया था कि पहले से ही कमजोर राज्य वित्त के साथ स्थानीय चुनाव आयोजित करने से अतिरिक्त दबाव आएगा।
लेकिन समगी जन बालावेगया (एसजेबी) जैसी विपक्षी पार्टियां विक्रमसिंघे पर आरोप लगा रही हैं कि वह हार के डर से ट्रेजरी से फंड को रोककर स्थानीय चुनावों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।विपक्षी दल उन पर अधिकारियों और चुनाव आयोग को प्रभावित करने का भी आरोप लगा रहे हैं।
एसजेबी पार्टी के सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट में एक मौलिक अधिकार याचिका दायर की, जिसमें राज्य के उन अधिकारियों के खिलाफ एक रिट की मांग की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वे (अधिकारी) चुनाव कराने के लिए जरूरी धन से इनकार कर रहे हैं। पिछले साल आर्थिक संकट के कारण मार्च में स्थानीय परिषदों के चुनाव को स्थगति कर दिया गया था। चार साल के कार्यकाल के लिए 340 स्थानीय परिषदों में नए प्रशासन के लिए चुनाव होना है।
सरकार ने बार-बार संकेत दिया है कि विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण आर्थिक संकट को देखते हुए चुनाव कराने का उचित समय नहीं है। सरकार का कहना है कि दस अरब रुपये के खर्च के साथ चुनाव कराने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।