चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से आयोजित तीसरी बेल्ट एंड रोड फोरम में भाग लेने के लिए विक्रमसिंघे ने 16 से 20 अक्तूबर तक चीन के दौरे पर थे। शुक्रवार को जारी संयुक्त बयान में श्रीलंका ने चीन की विवादास्पद परियोजना में सक्रिय रूप से भाग लेना की बात दोहराई थी।
नकदी संकट से जूझ रहे श्रीलंका पर कुल 46.9 अमेरिकी डॉलर का विदेशी कर्ज है, जिसका 52 प्रतिशत उसके सबसे बड़े ऋणदाता चीन का है। चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट को अमेरिका, भारत और कई अन्य देशों की ओर से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इसके तहत चीन विशाल बुनियादी ढांचों को विकिसत करने के लिए अन्य देशों को अरबों डॉलर का ऋण देते है।
श्रीलंका जैसे कई छोटे देश चीन की ओर से दिए गए कर्ज के मकड़जाल में उलझ गए हैं, कई देश गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं। संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष बीआरआई के तहत निर्माण में तेजी लाने के लिए संयुक्त रूप से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने पर सहमत हुए हैं।
हंबनटोटा बंदरगाह को अपने कब्जे में ले चुका है चीन
कोलंबो पोर्ट सिटी और हंबनटोटा बंदरगाह को बीआरआई परियोजना के तहत विकसित की गई हैं। कर्ज को न चुका ने पर चीन ने 2017 में श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह को अपने कब्जे में ले लिया था। इसे चीन 99 साल की लीज पर अपने कब्जे में ले लिया है। इसके बाद बीआरआई परियोजनाओं पर चिंताएं तेज हो गईं। श्रीलंका ने अपने चीन के उद्योग जगत की ओर से किए जाने का अधिक निवेश का स्वागत किया है, वहीं चीन की ओर से श्रीलंका में निवेश के लिए प्रोत्साहन को जारी रखने की घोषणा की गई है।