श्रीलंका के चुनाव आयोग ने रविवार को राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे को पत्र लिखकर कर्ज के बोझ से दबे देश में अगले महीने स्थानीय परिषद के चुनाव कराने के लिए जरूरी धन जारी करने का अनुरोध किया है।
देश के मौजूदा आर्थिक संकट से जुड़े कई कारणों के चलते स्थानीय निकाय चुनाव, जो पहले 9 मार्च के लिए निर्धारित थे, 25 अप्रैल तक स्थगित कर दिए गए। चुनाव आयोग के अटॉर्नी एट लॉ निमल जी. पंचीहेवा ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति विक्रमसिंघे को पत्र लिखकर निर्धारित तारीख पर स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए आवश्यक धन जारी करने का आग्रह किया है।
यह कदम तब उठाया गया है जब वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने पिछले महीने चुनाव आयोग को बताया था कि स्थानीय निकाय चुनावों के लिए वित्त मंत्रालय की ओर से धन का वितरण नहीं किया गया है।
इस महीने की शुरुआत में सरकार के प्रिंटर गंगानी लियानेज ने वित्त मंत्री और पुलिस प्रमुख से बहुप्रतीक्षित स्थानीय परिषद चुनाव कराने के लिए लिखित अनुरोध किया था। लियानेज के कार्यालय ने कहा कि 21 से 24 फरवरी तक डाक मतदान कराने के लिए मतपत्रों को प्रिंट करने में असमर्थता के कारण चुनाव आयोग ने चुनाव स्थगित कर दिए।
श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेजरी को निर्देश जारी किया कि चुनाव के संचालन में बाधा नहीं डाली जानी चाहिए। अदालत के आदेश के बाद चुनाव की तारीख 25 अप्रैल तय की गई थी और 18 से 21 मार्च के बीच पोस्टल वोटिंग होनी थी।
राष्ट्रपति विक्रमसिंघे वर्तमान में बेलआउट पैकेज के लिए आईएमएफ के साथ बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा है सरकार ऐसे समय में स्थानीय चुनाव आयोजित करने का जोखिम नहीं उठा सकती है जब देश चलाने के लिए आवश्यक वस्तुओं के भुगतान के लिए राज्य के व्यय को प्राथमिकता दी गई थी।
हालांकि, विपक्षी दलों ने विक्रमसिंघे पर चुनाव कराने से डरने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए लोकतंत्र को नष्ट करने का आरोप लगाया है। सत्तारूढ़ श्रीलंका पोडुजाना पेरामुना ने 2018 में हुए पिछले चुनाव में परिषदों का बहुमत जीता था। आर्थिक संकट के बाद से इसे बड़े उथल-पुथल का सामना करना पड़ा है।
चार साल के कार्यकाल के लिए 340 स्थानीय परिषदों में नए प्रशासन नियुक्त करने के लिए चुनाव पिछले साल मार्च से चल रहे आर्थिक संकट के कारण स्थगित कर दिए गए थे। चुनाव कई अदालती मामलों का विषय था, जिसे पार्टियों की ओर से इसके पक्ष और विपक्ष में दायर किए गए थे।
विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी के कारण श्रीलंका 2022 में अभूतपूर्व वित्तीय संकट से जूझ रहा था। यह 1948 में ब्रिटेन से आजादी के बाद से सबसे खराब संकट का दौर था। इससे देश में राजनीतिक उथल-पुथल मच गई, जिसके परिणामस्वरूप सर्वशक्तिमान राजपक्षे परिवार को सत्ता से बाहर कर दिया गया था।