श्रीलंका के मतदाता तीन उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में रखकर विजेता का चुनाव करता है। अगर किसी उम्मीदवार के पास पूर्ण बहुमत होता है तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है। अगर उम्मीदवार बहुत हासिल करने में नाकाम रहा तो दूसरे दौर की गिनती शुरू होगी, जिसमें दूसरी और तीसरी पसंद के वोटों को ध्यान में रखा जाएगा।
श्रीलंका के चुनाव आयोग ने किसी भी उम्मीदवार को राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए 50 फीसदी से अधिक वोट न मिलने के बाद दूसरी वरीयता गणना कराने का आदेश दिया। चुनाव आयोग के अध्यक्ष एमएएल रथनायके ने बताया कि अनुरा कुमारा दिसानायके और साजिथ प्रेमदासा को राष्ट्रपति चुनाव में सबसे ज्यादा वोट मिले, लेकिन दोनों में से किसी ने भी 50 फीसदी का आंकड़ा पार नहीं कर पाए। अब दूसरी वरीयता के वोटों को गिना जाएगा और इन दोनों उम्मीदवारों में जोड़ दिया जाएगा।
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नवीनतम परिणामों से पता चला कि नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) के अनुरा कुमार दिसानायके ने 39.52 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि विपक्षी नेता सजिथ प्रेमदासा 34.28 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे।
श्रीलंका के मतदाता तीन उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में रखकर विजेता का चुनाव करता है। अगर किसी उम्मीदवार के पास पूर्ण बहुमत होता है तो उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है। अगर उम्मीदवार बहुत हासिल करने में नाकाम रहा तो दूसरे दौर की गिनती शुरू होगी, जिसमें दूसरी और तीसरी पसंद के वोटों को ध्यान में रखा जाएगा।
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श्रीलंका में शनिवार को राष्ट्रपति पद के लिए वोट डाले गए और रात्रि कर्फ्यू के बीच मतगणना शुरू हुई। शुरुआती रुझानों के अनुसार, नेशनल पीपुल्स पावर अनुरा कुमार दिसानायके आगे चल रहे हैं। वह अपने प्रभावशाली प्रदर्शन के साथ रविवार को श्रीलंका के नौवें कार्यकारी राष्ट्रपति बनने के लिए तैयार दिख रहे हैं।
कौन है अनुरा कुमार दिसानायके
अनुरा कुमार दिसानायके कोलंबो जिलो के सांसद हैं। वर्तमान में वह नेशनल पीपुल्स पावर और जनता विमुक्ति पेरमुना पार्टी के नेता हैं। राष्ट्रपति पद के लिए उन्हेंने नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) गठबंधन के उम्मीदवार के तौर चुनाव लड़ा। इस गठबंधन में मार्क्सवादी-झुकाव वाली जनता विमुक्ति पेरेमुना (जेवीपी) पार्टी शामिल है। उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी उपायों और गरीबों के कल्याण के लिए नीति पर अपना ध्यान केंद्रित किया। दिसानायके ने चुनाव प्रचार के दौरान महत्वपूर्ण बदलावों का वादा किया, जिसमें आम चुनाव में नया जनादेश हासिल करने के लिए 45 दिनों के भीतर संसद को भंग करना भी शामिल है।