श्रीलंका में गृहयुद्ध के दौरान विवादस्पद रक्षा मंत्री रहे गोतबाया राजपक्षे ने देश के नए राष्ट्रपति के रूप में अनुराधापुर के रूवानवेली सेया में शपथ ली। उन्होंने जय श्री महाबोधि में पूजा-अर्चना भी की। ईस्टर पर हमलों के बाद हुए इन चुनावों में राजपक्षे की जीत से मुस्लिम समुदाय में चिंता है। समझा जाता है कि उन्होंने उदारवादी समझे जाने वाले सजीता प्रेमदासा के पक्ष में मतदान किया था।
सत्तारूढ़ यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के सूत्रों ने बताया कि गोतबाया के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद देश में संसदीय चुनाव की संभावना है। अगला संसदीय चुनाव 2020 के बाद होना था। विश्लेषकों के मुताबिक, राजपक्षे की जीत के बाद प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे और उनकी सरकार की स्थिति अस्थिर हो गई है। राजपक्षे अगले साल फरवरी के बाद संसद भंग कर चुनाव करा सकते हैं।
यूएनपी के प्रेमदासा के 13 लाख मतों से हारने के बाद पीएम विक्रमसिंघे पर पद छोड़ने का दबाव है। इस अप्रत्याशित हार के बाद कई मंत्रियों ने इस्तीफे की पेशकश की है जिनमें वित्तमंत्री मंगला समरवीरा भी शामिल हैं। अपनी हार के बाद प्रेमदासा ने उपनेता के रूप में अपनी पार्टी से इस्तीफा देते हुए संकेत दिया है कि वे पूरी तरह से राजनीति छोड़ सकते हैं।