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श्रीलंका : नए राष्ट्रपति गोतबाया ने तमिल मुस्लिमों के हितों की रक्षा का दिया भरोसा

Tue, 19 Nov 2019 05:55 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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श्रीलंका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे (फाइल फोटो) - फोटो : ट्विटर
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श्रीलंका में गृहयुद्ध के दौरान विवादस्पद रक्षा मंत्री रहे गोतबाया राजपक्षे ने देश के नए राष्ट्रपति के रूप में अनुराधापुर के रूवानवेली सेया में शपथ ली। उन्होंने जय श्री महाबोधि में पूजा-अर्चना भी की। ईस्टर पर हमलों के बाद हुए इन चुनावों में राजपक्षे की जीत से मुस्लिम समुदाय में चिंता है। समझा जाता है कि उन्होंने उदारवादी समझे जाने वाले सजीता प्रेमदासा के पक्ष में मतदान किया था।

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दरअसल, सात माह पूर्व इस्लामी आतंकियों द्वारा ईस्टर पर किए गए सिलसिलेवार धमाकों में सैकड़ों लोगों की मौत के बाद देश में सांप्रदायिक सौहार्द काफी प्रभावित हुआ है। ऐसे में देश के मुस्लिमों को गोतबाया राजपक्षे की जीत से कट्टरपंथी बौद्ध समुदाय को बल मिलने का अंदेशा है जिसने उनके विरुद्ध अभियान चलाया था। जबकि राजपक्षे बौद्ध हितों को बढ़ावा देते नजर आते हैं। 

शपथ से ठीक पहले राजपक्षे ने एक ट्वीट में कहा, ‘जीत के लिए कोशिश करने से ज्यादा जरूरी होता है जीत को बनाए रखना।’ राजपक्षे के बड़े भाई महिंदा राजपक्षे भी समारोह में मौजूद थे। वे 2005 से 2015 तक देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं। मुस्लिम समुदाय की आशंकाओं के बीच गोतबाया ने ट्वीट किया कि वे राष्ट्रपति बनने के लिए उन लोगों के भी आभारी हैं जिन्होंने उन्हें वोट नहीं दिया है।

संसदीय चुनाव की संभावना जल्द

सत्तारूढ़ यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के सूत्रों ने बताया कि गोतबाया के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद देश में संसदीय चुनाव की संभावना है। अगला संसदीय चुनाव 2020 के बाद होना था। विश्लेषकों के मुताबिक, राजपक्षे की जीत के बाद प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे और उनकी सरकार की स्थिति अस्थिर हो गई है। राजपक्षे अगले साल फरवरी के बाद संसद भंग कर चुनाव करा सकते हैं।

विक्रमसिंघे पर इस्तीफे का दबाव, प्रेमदासा छोड़ सकते हैं राजनीति

यूएनपी के प्रेमदासा के 13 लाख मतों से हारने के बाद पीएम विक्रमसिंघे पर पद छोड़ने का दबाव है। इस अप्रत्याशित हार के बाद कई मंत्रियों ने इस्तीफे की पेशकश की है जिनमें वित्तमंत्री मंगला समरवीरा भी शामिल हैं। अपनी हार के बाद प्रेमदासा ने उपनेता के रूप में अपनी पार्टी से इस्तीफा देते हुए संकेत दिया है कि वे पूरी तरह से राजनीति छोड़ सकते हैं।

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