भारत और चीन के बीच सभ्यतागत संपर्क की आधारशिला रखने में भारतीय बौद्ध भिक्षु कुमारजीवा की अहम भूमिका थी। कुमारजीवा उन शुरुआती विद्वानों में थे, जिनके चीन में रहने के दौरान ही करीब 2000 साल पहले बौद्ध सूत्रों का चीनी भाषा में अनुवाद हुआ। दोनों देशों के विद्वानों(स्कॉलरों) ने बीजिंग में यह जानकारी दी।
स्कॉलरों ने बताया कि कुमारजीवा तत्कालीन कच्छ साम्राज्य के एक कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से थे, जिन्होंने चीन में करीब 23 साल बिताए थे। चौथी शताब्दी में वह एक कैदी के रूप में और सबसे सम्मानित विद्वान के रूप में जाने जाते थे।
भाजपा नेता तरुण विजय ने बताया कि बौद्ध धर्म का प्रचार करने चीन गए सैकड़ों गुरुओं में सबसे महान माने जाने वाले कुमारजीवा को उस समय के चीनी राजा 'चीन का राष्ट्रीय शिक्षक' कहते थे।
तरुण विजय ने बंगलूरू से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के साथ पिछले एक हफ्ते के दौरान चीन में 1,150 किलोमीटर लंबे कुमारजीवा पथ की यात्रा की। इस दौरान वे उनकी याद में बने स्मारकों में गए।
उन्होंने अपनी यात्रा के बाद यहां भारतीय दूतावास में रविवार को कई चीनी विद्वानों के साथ एक संगोष्ठी का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने कुमारजीवा के जीवन और कार्यों के बारे में चर्चा की, जो चीन में आदरणीय है, लेकिन भारत में बहुत कम लोग उन्हें जानते हैं।