श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना के फिर से सियासी मैदान में कूद पड़ने से देश की राजनीति गरमा गई है। सिरिसेना ने सबको हैरत में डालते हुए 2015 के राष्ट्रपति चुनाव में तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को हरा दिया था। अब उन्होंने अगले राष्ट्रपति चुनाव में फिर उम्मीदवार बनने का एलान कर दिया है।
सिरिसेना ने राजनीति में वापसी का एलान करते हुए अपनी तुलना दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद विरोधी अंदोलन के नेता नेल्सन मंडेला से की। उन्होंने कहा, 'मंडेला 27 साल तक जेल में रहे। लेकिन वह जेल से बाहर आए, और लोगों ने उन्हें अपना राष्ट्रपति चुना। मैं भी किसी मुश्किल के आगे नहीं झुकूंगा। मुझ पर किसी साजिश का असर नहीं पड़ेगा।' सिरिसेना ने कहा, 'मैंने मंडेला को पढ़ा है। मुझसे चाहे जितनी बदसलूकी की जाए, मैं अपनी पार्टी के समर्थन से अगला राष्ट्रपति चुनाव लड़ूंगा और मुझे मालूम है कि मेरी जीत होगी।'
सिरिसेना ने यह बयान श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला आने के बाद बने हालात के बीच दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सिरिसेना और चार बड़े रक्षा अधिकारियों को आदेश दिया है कि 2019 में ईस्टर के दिन हुए बम धमाकों में मारे गए 269 लोगों के परिजनों को वे 31 करोड़ 10 लाख रुपये का मुआवजा दें। बम धमाकों के समय सिरिसेना राष्ट्रपति थे। सुप्रीम कोर्ट ने इन हमलों की जवाबदेही तय करते हुए यह आदेश दिया है।
इस फैसले का श्रीलंका के कैथोलिक चर्च ने स्वागत किया है। उसने उम्मीद जताई है कि अब उस समय सत्ता में रहे कुछ लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी चलाया जाएगा। श्रीलंका के कैथोलिक चर्च के प्रमुख आर्चबिशप मैल्क कार्डिनल रंजीत ने उम्मीद जताई कि इस निर्णय से देश में समानता के एक नए युग की शुरुआत होगी और यह सुनिश्चित होगा कि कोई पदाधिकारी या राजनेता कानून के ऊपर नहीं है।
श्रीलंका की वामपंथी पार्टी जेवीपी ने भी चुनावी ताल ठोकी
इस बीच श्रीलंका की वामपंथी पार्टी जनता विमुक्ति पेरमुना (जेवीपी) ने भी चुनावी ताल ठोक दी है। पार्टी के नेता अरुणा कुमारा दिसानायके ने एलान किया है कि अगर जेवीपी की सरकार बनी, तो देश में दो लाख रुपये तक प्रति महीने आमदनी वाले लोगों को इनकम टैक्स की सीमा से बाहर कर दिया जाएगा। अभी ये सीमा एक लाख रुपये है। जेवीपी धनी लोगों पर अधिक टैक्स लगाने की समर्थक रही है। इसलिए दिसानायके के इस एलान से लोगों को हैरत हुई है। आलोचकों ने इसे चुनाव जीतने के लिए सस्ती लोकप्रियता का सहारा लेने की कोशिश बताया है।
अगले चुनाव में जेवीपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को मिल सकती है सफलता
पर्यवेक्षकों की राय है कि अगले चुनाव में जेवीपी के नेतृत्व वाले नेशनल पीपुल्स पॉवर गठबंधन को काफी सफलता मिल सकती है। देश में सत्ता में रह चुकी पार्टियों को लेकर लोगों में गहरी नाराजगी है। वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम पर छपे एक विश्लेषण में बताया गया है कि गोटबया राजपक्षे सरकार के समय दिखा अभूतपूर्व जन असंतोष अभी सुलग रहा है। देश में आर्थिक संकट दूर होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है। ऐसे में जेवीपी की वामपंथी राजनीति को जनता के एक बड़े हिस्से में समर्थन मिल रहा है। इसीलिए पर्यवेक्षकों ने दिसानायके की घोषणा को गंभीरता से लिया है।