विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा ने मंगलवार को संसद में कहा कि सार्वजनिक वित्त पर संसद का अधिकार है, आईएमएफ के साथ हाल ही में घोषित कर्मचारी-स्तरीय समझौते को संसद में पेश किया जाना चाहिए।
ऐतिहासिक आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने 2.9 अरब डॉलर के कर्ज का एलान तो कर दिया है, लेकिन उसकी मुश्किलें अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब श्रीलंका में विपक्षी दल ने आईएमएफ के साथ हुए समझौते को संसद पटल पर रखने की मांग की है।
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दरअसल, एक सितंबर को आईएमएफ और श्रीलंकाई अधिकारियों के बीच लगभग 2.9 अरब डॉलर की विस्तारित फंड सुविधा (ईएफएफ) के तहत 48 माह के कर्ज पर सहमति बनी है।
समर्थन चाहिए तो संसद में पेश हो रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी नेता साजिथ प्रेमदासा ने मंगलवार को संसद में कहा कि सार्वजनिक वित्त पर संसद का अधिकार है, आईएमएफ के साथ हाल ही में घोषित कर्मचारी-स्तरीय समझौते को संसद में पेश किया जाना चाहिए। संसद के एसजेबी सदस्य और सार्वजनिक वित्त पर संसदीय समिति के अध्यक्ष हर्ष डी सिल्वा ने प्रेमदासा के आह्वान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, अगर सरकार को आईएमएफ द्वारा अनुशंसित आर्थिक सुधारों के लिए विपक्ष के समर्थन की आवश्यकता है, तो संसद को समझौते से अवगत कराया जाना चाहिए। उधर, सरकार की ओर से कहा गया है कि समझौते को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सामने ही रखा जाएगा।
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आईएमएफ ने कई कदम उठाने का कहा था
आईएमएफ ने अपने बयान में कहा था कि, संकटग्रस्त देश की आर्थिक नीतियों को समर्थन देने की खातिर कर्मचारी स्तर के समझौते पर सहमत हुए हैं। इस व्यवस्था के तहत विस्तारित कोष सुविधा (ईएफएफ) में 48 महीने की अवधि के दौरान 2.9 अरब डॉलर दिए जाएंगे।’ इसमें कहा गया कि इस मदद का उद्देश्य श्रीलंका में व्यापक आर्थिक स्थिरता और ऋण वहनीयता को बहाल करना है और इसके साथ-साथ वित्तीय स्थिरता की रक्षा करना भी है। आर्थिक मदद देने से पहले आईएमएफ ने श्रीलंका को कई सुधारात्मक कदम उठाने को कहा था। उसने ऋण वहनीयता सुनिश्चित करने और वित्तीय खाई को पाटने में मदद देने के लिए बहुपक्षीय साझेदारों से अतिरिक्त आर्थिक मदद करने और श्रीलंका के कर्जदाताओं से कर्ज राहत देने का आह्वान भी किया था।