श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। मौजूदा राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे पहले ही निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं। इसके अलावा सरथ कीर्तिरत्ने ने निर्दलीय और मार्क्सवादी जेवीपी नेता अनुरा कुमारा दिसानायके, विजेयदासा राजपक्षे ने भी चुनाव लड़ने का एलान किया
श्रीलंका में 21 सितंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रत्याशी के तौर पर विपक्ष के नेता सजित प्रेमदासा ने बुधवार को नामांकन किया। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग में जमानत राशि जमा की। वहीं अब तक राष्ट्रपति चुनाव के लिए पांच उम्मीदवार सामने आ गए हैं।
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श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। मौजूदा राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे पहले ही निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर चुके हैं। उन्हें श्रीलंका पोडुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) और यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के 116 पूर्व प्रांतीय परिषद सदस्यों के एक समूह ने समर्थन देने की बात कही है। वहीं मंगलवार को 92 संसद सदस्यों ने भी मुलाकात करके समर्थन देने का वादा किया।
इसके अलावा 26 जुलाई तक सरथ कीर्तिरत्ने ने निर्दलीय और मार्क्सवादी जेवीपी नेता अनुरा कुमारा दिसानायके ने भी चुनाव लड़ने का एलान किया। इसके अलावा श्रीलंका के न्याय मंत्री विजेयदासा राजपक्षे भी अपने पद से इस्तीफा देकर राष्ट्रपति चुनाव मैदान में दम दिखाने के लिए तैयार हैं। बुधवार को संसद के मुख्य विपक्षी दल मगी जन बालवेगया (एसजेबी) के नेता सजित प्रेमदासा ने पार्टी के महासचिव रंजीत मद्दुमा बंडारा के साथ चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचकर नामांकन दाखिल किया। कोलंबो से सांसद प्रेमदासा पूर्व राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा के बेटे हैं।
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आर्थिक सुधारों का भविष्य तय करेगा चुनाव
श्रीलंका के 2022 में आर्थिक रूप से दिवालिया होने के बाद यह पहला चुनाव होगा। देश जब सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा था, तब विक्रमसिंघे ने द्वीप राष्ट्र की कमान संभाली थी। चुनाव लड़ने के लिए नामांकन 15 अगस्त को होगा।
बदलावों को भुनाने का प्रयास कर रहे विक्रमसिंघे
विक्रमसिंघे खुद को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पेश करके आर्थिक बदलावों को भुनाने का प्रयास कर रहे हैं। वह इस बात लोगों से यह बात कह रहे हैं कि कैसे उन्होंने 2022 दिवालिया होने के बाद देश में आर्थिक बदलाव किए। 1948 में ब्रिटेन से आजादी हासिल करने के बाद 2022 में द्वीप राष्ट्र ने सबसे बड़े आर्थिक संकट का सामना किया था। श्रीलंका ने आधिकारिक तौर पर खुद को दिवालिया घोषित किया था।