श्रीलंका में वर्ष 2019 में हुए बम धमाके के आरोपियों के देश की खुफिया एजेंसियों से संपर्क होने का दावा किया जा रहा है। इसे देखते हुए श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने इन आरोपों की जांच का आदेश दिया है। खबरों में कहा गया है कि राज्य की खुफिया एजेंसियों के कुछ सदस्य 2019 में ईस्टर संडे को बम विस्फोटों को अंजाम देने वाले लोगों को जानते थे और उनसे मिले थे। इन विस्फोटों में 260 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी।
श्रीलंका में कैथोलिक चर्च ने मंगलवार को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर सरकार द्वारा आत्मघाती बम विस्फोटों के मामले से निपटने के तौर तरीकों को लेकर चिंता व्यक्त की और उनसे खुफिया कर्मियों और हमलों को अंजाम देने वाले समूह के बीच कथित संबंधों की जांच करने को कहा।
आईएस समर्थित दो समूहों ने कराए थे हमले
आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के प्रति निष्ठा रखने वाले श्रीलंका के दो स्थानीय मुस्लिम समूहों ने अप्रैल 2019 में चर्चों और प्रमुख पर्यटक होटलों पर एक के बाद एक छह हमले किए थे। इनमें 269 लोगों की मौत हुई थी। एक अन्य व्यक्ति ने चौथे पर्यटक होटल पर सुनियोजित हमला नहीं किया था, लेकिन बाद में एक अलग स्थान पर उसने विस्फोट करके खुद को मार डाला था।
'नेशनल कैथोलिक कमेटी फॉर जस्टिस टू ईस्टर संडे अटैक विक्टिम्स', जो कोलंबो के आर्कबिशप कार्डिनल मैलकोल्म रंजीत की अगुवाई वाला बिशप और पादरियों का समूह है, उसने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के खिलाफ लापरवाही के लिए कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है, इसकी सिफारिश राष्ट्रपति जांच आयोग में की गई है। सिरीसेना की सरकार की उस समय भारी आलोचना हुई थी, जब उसने विदेशी खुफिया एजेंसी की इन चेतावनियों पर कार्रवाई नहीं की थी कि देश में हमला हो सकता है।
पूर्व पीएम रानिल विक्रमसिंघे की भी जांच की मांग
मीडिया मंत्री केहेलिया रामबुक्वेला ने बुधवार को कहा कि आयोग के सभी निष्कर्षों को उचित अधिकारियों को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने सभी निष्कर्षों को आगे की कार्रवाई के लिए प्रासंगिक एजेंसियों को भेज दिया है। चर्च समूह ने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की जांच होनी चाहिए क्योंकि रिपोर्ट में निष्कर्ष दिया गया है कि इस्लामी चरमपंथ के प्रति उनके नरम दृष्टिकोण के कारण हमले हुए थे। कई सांसदों ने संसद में आयोग के सामने पेश हुए गवाहों का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की खुफिया एजेंसियों के सदस्य उस व्यक्ति से मिले थे, जो आत्महत्या करने से पहले शुरुआती हमले से पीछे हट गया था।