श्रीलंका के प्रभावशाली बौद्ध भिक्षुओं ने राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे के इस्तीफे पर जोर डालने के लिए नए सिरे से आंदोलन शुरू कर दिया है। शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति राजपक्षे के सरकारी आवास पर कब्जा कर लिया। हालांकि राष्ट्रपति गोटबया ने राजपक्षे प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से पहले ही आवास छोड़ दिया था। शनिवार को राष्ट्रपति के सरकारी आवास के करीब गॉल फेस पर विशाल जन प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए सोशल मीडिया पर जोरदार मुहिम चलाई जा रही थी और देश भर के लोगों से इसमें पहुंचने की अपील की गई।
इस प्रदर्शन को रोकने के लिए राजपक्षे सरकार की न्यायपालिका की आड़ लेने की कोशिश कामयाब नहीं हो सकी है। पुलिस ने एक अदालत में अर्जी देकर इस प्रदर्शन पर रोक लगाने की गुजारिश की थी। लेकिन गुरुवार को अदालत ने वो याचिका ठुकरा दी। इससे विरोध प्रदर्शन का रास्ता खुल गया है। अब शनिवार को कोलंबो में आम जन जीवन के अस्त-व्यस्त हो जाने का अनुमान लगाया गया है।
बौद्ध भिक्षुओं के आंदोलन को राष्ट्रपति राजपक्षे के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है। नवंबर 2019 में हुए चुनाव में भिक्षुओं ने उन्हें अपना पुरजोर समर्थन दिया था। दो करोड़ 20 लाख आबादी वाले श्रीलंका में बहुसंख्यक सिंहली समुदाय बौद्ध धर्म को मानता है। इसलिए भिक्षुओं का समर्थन महत्वपूर्ण समझा जाता है। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों की राय है कि देश में महंगाई और जरूरी चीजों के अभाव के कारण जनमत का एक बड़ा हिस्सा राजपक्षे परिवार से निकटता के कारण भिक्षुओं के खिलाफ होने लगा था। इसीलिए अब बौद्ध भिक्षु सरकार विरोधी रुख अपनाने को मजबूर हो गए हैं।