श्रीलंका से समुद्र के रास्ते अवैध ढंग से लोगों के देश से बाहर जाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले महीने सरकार ने इस पर रोक लगाने के लिए वेसल्स मॉनिटरिंग सिस्टम (वीएमएस) लगाने का एलान किया था। बिना इजाजत के लोगों को बाहर जाने से रोकने के लिए कई दूसरे कदम भी उठाए गए। इसके बावजूद अब अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि आर्थिक मुसीबतों के कारण देश छोड़ने के बाहर जाने पर लगाम लगाने की कोशिश कामयाब नहीं हुई है।
एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक बीते सात दिन में श्रीलंका के सुरक्षा बलों ने समुद्री मार्ग से देश छोड़ने की कोशिश कर रहे 100 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से ज्यादातर लोग ऑस्ट्रेलिया जाने की कोशिश में थे। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि देश भर में लाखों लोग किसी ना किसी तरह से देश से निकल जाने की इच्छा जता रहे हैं।
श्रीलंका सरकार ने खुद कहा है कि आर्थिक संकट अभी भी अपनी चरम सीमा पर नहीं पहुंचा है। यानी अभी आने वाले दिनों में मुसीबत और बढ़ सकती है। देश में खान-पान की चीजों की भारी कमी है। अर्थव्यवस्था के ठहर जाने के कारण हजारों लोगों की नौकरी का जाना जारी है। दिहाड़ी मजदूरों को अक्सर काम नहीं मिल रहा है। उधर बड़ी संख्या में मध्य वर्ग के लोग अब निम्न आय वर्ग की श्रेणी में गिरते जा रहे हैं।
एक माइग्रेशन एक्सपर्ट ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम से कहा कि लोगों को अपनी जिंदगी के सबसे बुरे संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में जब वे यह सुनते हैं कि अभी और खराब समय आने वाला है, तो जाहिर है, वे बेहतर विकल्प के बारे में सोचने लगते हैं। वे मछली मारने की नौकाओं के जरिए समुद्री रास्ते से किसी दूसरे देश की तरफ जाने लगते हैं। उस विशेषज्ञ ने कहा, ‘हजारों लोग वैध तरीके से बाहर जाने के प्रयास में हैं। लेकिन गरीब लोगों के पास उतनी जागरूकता नहीं है। ना ही कानूनी दस्तावेज तैयार कराने लायक उनके पास पैसा है।’
ऑस्ट्रेलिया सरकार कम से कम दो बार वहां अवैध रूप से पहुंचे श्रीलंकाइयों को वापस भेज चुकी है। हाल में ऐसे 480 लोग लौटाए गए, जो बिना वीजा के वहां पहुंच गए थे। इधर श्रीलंका की नौ सेना ने बताया है कि अब तक वह अवैध रूप से बाहर जाने की कोशिश कर रहे लगभग पांच सौ लोगों को हिरासत में ले चुकी है।
श्रीलंका ने वीएमडी के साथ मछुआरों की निगरानी का एक केंद्र बनाया है। ये एजेंसी रोज मछुआरों की लगभग चार हजार नौकाओं की जांच करती है। इस दौरान अधिकारियों की कोशिश उन लोगों की पहचान करने की होती है, जिनका मकसद श्रीलंकाई जल सीमा से बाहर निकल जाना होता है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक लोगों को गैर कानूनी रूप से देश से निकालने का एक बड़ा धंधा फूल-फल रहा है। इस काम में लगे एजेंट बाहर जाने को बेसब्र लोगों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि असल समस्या आर्थिक संकट है। फिर सरकार अवैध एजेंटों पर कार्रवाई करने में नाकाम रही है। ऐसे में अवैध माइग्रेशन रोकना लगातार मुश्किल बना हुआ है।