श्रीलंका को अपने नागरिकों के लिए बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आने वाले छह महीनों में करीब पांच बिलियन डॉलर की मदद की आवश्यकता है। जबकि, सरकार पर पहले से ही 51 बिलियन अमेरिकी डॉलर का विदेशी कर्ज बकाया है।
श्रीलंका इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पिछले दिनों हुए देशव्यापी प्रदर्शनों, राजनैतिक उथल-पुथल के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था का बुरा हाल है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का एक शीर्ष प्रतिनिधिमंडल जल्द ही कोलंबो की यात्रा कर सकता है। माना जा रहा है कि आईएमएफ का दल सरकार के साथ कर्मचारी स्तर के समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अगले सप्ताह ही कोलंबो पहुंच सकता है।
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जानकारी के मुताबिक, 24 से 31 अगस्त के दौरान आईएमएफ का दल कोलंबो की यात्रा कर सकता है। इस दौरान आर्थिक और वित्तीय सुधारों और नीतियों पर चर्चा संभव है। अधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य एक पैकेज पर एक कर्मचारी-स्तर के समझौते तक पहुंचने की दिशा में प्रगति करना है। दरअसल, आर्थिक संकट के चलते श्रीलंका सरकार ने इसी साल जून में आईएमएफ के साथ संभावित राहत पैकेज पर बातचीत शुरू की थी। हालांकि, देश में राजनीतिक उथल-पुथल के कारण वार्ता रुक गई थी।
पांच बिलियन डॉलर की श्रीलंका को जरूरत
श्रीलंका को अपने नागरिकों के लिए बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आने वाले छह महीनों में करीब पांच बिलियन डॉलर की मदद की आवश्यकता है। जबकि, सरकार पर पहले से ही 51 बिलियन अमेरिकी डॉलर का विदेशी कर्ज बकाया है, जिसमें से 28 बिलियन अमेरिकी डॉलर का 2027 तक भुगतान किया जाना है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे श्रीलंका में मुद्रास्फीति जुलाई में बढ़कर 60.8 प्रतिशत हो गई, जो जून में 54.6 प्रतिशत थी।