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लैटिन अमेरिकी देशों में कोरोना संकट के बीच भ्रष्टाचार ने पसारे पैर

Wed, 27 May 2020 01:49 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मियामी

सार

  • लैटिन अमेरिकी देशों में कोरोना के साथ भ्रष्टाचार के मामले बढ़े
  • मास्क, वेंटिलेटर जैसे सामान को 10 गुना दाम पर बेचने का आरोप
  • रियो डी जेनेरियो में गवर्नर के घर पर पुलिस ने मारा छापा
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कोरोना संकट के बीच भ्रष्टाचार - फोटो : PTI
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विस्तार
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कोरोना महामारी के बीच भी लैटिन अमेरिकी देशों में ठगने व भ्रष्टाचार का दौर खत्म नहीं हुआ है। अर्जेंटीना से लेकर पनामा तक कई अधिकारियों को वेंटिलेटर, मास्क और मेडिकल आपूर्ति की गलत खरीदारी की रिपोर्ट के इकट्ठा होने पर इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया। 

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लैटिन अमेरिका में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, मौतों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। इसी के साथ अर्थव्यवस्था में भी गिरावट का दौर चल रहा है। लेकिन यहां कोरोना के साथ साथ भ्रष्टाचार के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

मंगलवार को रियो डी जेनेरियो में पुलिस ने गवर्नर के घर पर छापा मारा। गवर्नर पर आरोप था कि उन्होंने अस्पताल बनाने के लिए आंवटित किए गए सार्वजनिक फंड में से 15 करोड़ रुपये का गबन किया है। 
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कोलंबिया में 32 में से 14 गवर्नर सरकारी पैसे के गबन के आरोप में जांच के दायरे में हैं। इधर, अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में अभियोजनकर्ता इस जांच पड़ताल में लगे हैं कि एक्सायरी डेट वाले 15,000 एन-95 मास्क को खरीदने और 10 गुना दाम पर जनता बेचने के बीच कोई राजनैतिक गठजोड़ है।

इस सबके बीच सबसे बड़ा घोटाला बोलिविया में हुआ जहां स्वास्थ्य मंत्री को इस आरोप पर गिरफ्तार किया गया कि वहां 170 वेंटिलेटर को बढ़े हुए दाम के साथ बेचा गया है। सांस लेने वाली मशीन को लगभग 21 लाख रुपये में बेचा गया है, जबकि मशीन बनाने वाली स्पेनिश कंपनी ने कहा कि ये मशीन डिस्ट्रीब्यूटर को करीब पांच लाख रुपये में बेचा गया था।

इन जांचों से राष्ट्रपति के पद के लिए अंतरिम नेता जीनिन अनीज की कु्र्सी छिनने का डर पैदा हो सकता है, उन्होंने नवंबर में ही पदभार संभाला था। इसके अलावा ब्राजील, जहां कोरोना के दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा मामले हैं, वहां भी पुलिस ने महामारी संबंधी अपराधों के लिए कोरोना जाटो नाम से टास्क फोर्स बनाया है।

सिर्फ लैटिन अमेरिकी देशों में ही नहीं, स्पेन, इटली और दूसरे देशों में भी महामारी के दौरान भ्रष्टाचार करने के आरोप लगे हैं। लेकिन लैटिन अमेरिका में सरकारी फंड चुराना इसलिए हैरान करता है क्योंकि वहां की सामाजिक सुरक्षा पहले ही जीर्ण-शीर्ण है।

इंटर अमेरिकन डेवलेपमेंट बैंक में उच्च पारदर्शिता के जानकार रॉबर्टो डी मिसली का कहना है कि हर साल वैश्विक स्वास्थ्य का 10-25 फीसद हिस्सा भ्रष्टाचार में ही जाता है और ये कोई नई बात नहीं है, एकदम सामान्य है।

उन्होंने बताया कि महामारी जैसी परिस्थितियों में भ्रष्टाचार के मामले बढ़ना जायज है क्योंकि बहुत लोग और व्यापारी इसमें अपना फायदा देखते हैं। ये कोई सांस्कृतिक विरासत नहीं है, यह संस्थानों और सिस्टम की देन है।

लैटिन अमेरिका के देश लगातार भ्रष्ट देशों की सूची में उच्च स्थान पर आ रहे हैं। बर्लिन के ताजा पारदर्शिता अंतर्राष्ट्रीय के सर्वे के मुताबिक पिछले साल पांच में से एक इंसान ने पुलिस या सरकारी अधिकारी को रिश्वत देने की बात मानी है। 

हालांकि डी मिसली सकारात्मकता के साथ कहते हैं कि एक दिन सामाजिक दबाव के तहत ये सब खत्म हो जाएगा। वह कहते हैं कि सरकारी फंड को सुरक्षित करने के लिए तकनीकी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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