कोरोना के मुद्दे पर चीन चौतरफा घिर गया है। अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों ने उस पर इस महामारी के बारे में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। अब देश के भीतर भी शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। इससे जनता का ध्यान भटकाने के लिए चीन का शीर्ष नेतृत्व अब राष्ट्रवाद को हवा देने में लगा है। वह भारत के साथ सीमा पर लगातार तनाव बढ़ा रहा है और साथ ही उसने ताइवान की तरफ दो विमानवाही जंगी जहाज को रवाना कर दिया है।
चीन के इस कदम से ताइवान पर हमले की आशंका बढ़ गई है। इससे अमेरिका और चीन के रिश्तों मैं तनाव और बढ़ सकता है। चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग ने हाल में कहा था कि उनका देश ताइवान को अपने साथ में लाना चाहता है। विमानवाही लियाऑनिंग और शैडोंग अभी येलो सी की बोहोई खाड़ी में मिशन की तैयारी में लगे हैं। इन्हें ताइवान के करीब प्रटास आईलैंड्स पर भेजा जा रहा है। वहां यह दोनों जंगी जहाज युद्धाभ्यास में शामिल होंगे।
ताइवान का कहना है कि कोरोना वायरस के प्रकोप फैलने के बाद से चीनी सेना की दादागिरी बढ़ गई है। चीन के लड़ाकू विमान और जंगी जहाज लगातार ताइवान के आसपास युद्धाभ्यास कर रहे हैं। चीन इसे नियमित अभ्यास बताता है। ताइवान की आजादी की समर्थक साई-इंग-वेन ने हाल में दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने उन्हें दोबारा निर्वाचित होने पर बधाई दी थी इस बात से चीन चिढ़ गया है।
चीन का कहना है कि ताइवान उसके लिए सबसे संवेदनशील और अहम मुद्दा है। वह ताइवान को हर हाल में चीन में मिलाना चाहता है। ली केकियांग ने चीनी संसद की सालाना बैठक में कहा है कि देश ताइवान की आजादी की किसी भी मुहिम का विरोध करेगा।