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South Korea: दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति चुनाव का एलान, महाभियोग के जरिए येओल को पद से हटाए जाने के बाद फैसला

Tue, 08 Apr 2025 09:51 AM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सियोल

सार

इससे पहले 4 अप्रैल को दुर्भावना से देश में मार्शल लॉ लगाने के आरोप में दक्षिण कोरिया की संवैधानिक अदालत ने राष्ट्रपति यून सुक योल को पद से हटाने का आदेश दिया था। अदालत के आदेश के बाद यून सुक योल के विरोधियों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। 
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यून सुक येओल - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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दक्षिण कोरिया ने नया राष्ट्रपति चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। देश में अपदस्थ राष्ट्रपति यून सुक येओल की जगह लेने के लिए 3 जून को राष्ट्रपति चुनाव कराया जाएगा। देश के कार्यवाहक नेता हान डक-सू ने मंगलवार को घोषणा की कि हाल ही में अपदस्थ राष्ट्रपति यून की जगह लेने के लिए 3 जून को समयपूर्व राष्ट्रपति चुनाव होंगे। यह घोषणा संवैधानिक न्यायालय की ओर से यून सुक येओल को दिसंबर में मार्शल लॉ लागू करने के दुर्भाग्यपूर्ण मामले में पद से हटाए जाने के कुछ दिनों बाद की गई।

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3 जून के चुनाव में दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है। यून की रूढ़िवादी पीपुल्स पावर पार्टी और इसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच यह रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है। देखना होगा कि क्या रूढ़िवादी फिर से संगठित हो सकते हैं और संभावित डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ली जे-म्यांग को चुनौती देने के लिए एक मजबूत उम्मीदवार को मैदान में उतार सकते हैं? सत्तारूढ़ पीपुल्स पावर पार्टी के लिए सत्ता में बने रहना एक कठिन लड़ाई होगी, क्योंकि वह जनता का विश्वास बहाल करने और यून के मार्शल लॉ स्टंट से उपजे गंभीर आंतरिक फूट को ठीक करने के लिए संघर्ष कर रही है।

यह भी पढ़ें- मार्शल लॉ लागू करने के लिए राष्ट्रपति यून सुक योल को पद से हटाया गया, संवैधानिक अदालत का फैसला
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सर्वेक्षणों में विपक्ष को बढ़त के आसार
विभिन्न सर्वेक्षणों से पता चला है कि विपक्षी पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ली जे म्यांग, देश का अगला राष्ट्रपति बनने की रेस में सबसे आगे हैं। जब संवैधानिक अदालत ने यून सुक योल को राष्ट्रपति पद से हटाने का फैसला सुनाया तो उस वक्त राजधानी सियोल में यून सुक योल के खिलाफ एक रैली आयोजित हो रही थी। जैसे ही अदालत ने यून सुक योल को पद से हटाने का फैसला सुनाया तो रैली में लोग खुशी से झूम उठे और नाचने लगे।
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पूरे मामले को समझिए
यून सुक येओल ने बीते साल 3 दिसंबर को देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया था और सैंकड़ों सैनिकों और पुलिस अधिकारियों को नेशनल असेंबली भेज दिया था। यून सुक योल ने तर्क दिया कि उन्होंने सिर्फ सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसा किया था, लेकिन जांच के दौरान सैन्य अधिकारियों ने बताया कि यून ने उन्हें विपक्षी सांसदों को सदन से बाहर निकालने का आदेश दिया था, ताकि वे यून के आदेश के खिलाफ मतदान न कर सकें। हालांकि, विपक्षी सांसद किसी तरह सफल रहे और उन्होंने योल के आदेश के खिलाफ मतदान कर उसे रद्द करा दिया।

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