फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दक्षिण कोरिया के जनसंख्या आंकड़ों में छिपा है दुनिया के लिए एक सबक

Tue, 05 Jan 2021 01:32 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिओल

सार

दक्षिण कोरिया के जनसंख्या संबंधी आंकड़ों से सामने आया है कि इतिहास में पहली बार इस देश की आबादी घटी है। ऐसा जन्मदर में भारी गिरावट के कारण हुआ है...
विज्ञापन
South Korea President Moon Jae in - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दक्षिण कोरिया से आए जनसंख्या संबंधी ताजा आंकड़ों को दुनियाभर के विकास अर्थशास्त्रियों (डेवलपमेंट इकॉनोमिस्ट्स) ने बेहद दिलचस्पी से देखा है। इससे उनकी इस बात की पुष्टि हुई है कि आबादी पर नियंत्रण का सबसे अच्छा उपाय मानव विकास और व्यक्तियों खासकर महिलाओं को अपने जीवन में चयन संबंधी स्वतंत्रता उपलब्ध कराना है। दक्षिण कोरिया में इन मामलों में एशिया में एक अग्रणी देश रहा है। उसने वो उपलब्धि हासिल कर ली है, जिसके लिए चीन ने जोर-जबर्दस्ती का सहारा लिया। ये दीगर बात है कि ये उपलब्धि एक सीमा के बाद अब दक्षिण कोरिया के लिए चिंता का विषय बन गई है।

विज्ञापन


दक्षिण कोरिया के जनसंख्या संबंधी आंकड़ों से सामने आया है कि इतिहास में पहली बार इस देश की आबादी घटी है। ऐसा जन्मदर में भारी गिरावट के कारण हुआ है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक बीते 31 दिसंबर को दक्षिण कोरिया की आबादी पांच करोड़ 18 लाख, 29 हजार तेइस थी। यानी एक साल पहले की तुलना में यह 20,838 कम हो गई। इसके पहले हर साल आबादी में वृद्धि होती रही थी। लेकिन वृद्धि दर में गिरावट लंबे समय से जाहिर हो रही थी। 2010 में आबादी वृद्धि दर 1.49 फीसदी थी, जो 2019 में महज 0.05 फीसदी रह गई थी। इस साल ये दर माइनस में चली गई है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण कोरिया में 2020 में 2,75,815 शिशुओं ने जन्म लिया। जबकि 3,07,764 लोगों की मृत्यु हुई। दक्षिण कोरिया उन देशों में है, जो मोटे तौर पर कोरोना महामारी से अप्रभावित रहे हैं। यानी जन्म की तुलना में ज्यादा मौतें होने का संबंध कोरोना से नहीं है। बल्कि दक्षिण कोरिया में जो ट्रेंड दिखा है, वह जापान में दिख रहे रुझान से मेल खाता है। जापान में भी जन्म दर में गिरावट आई है। इन दोनों देशों में इस ट्रेंड को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि आबादी घटने का मतलब श्रम शक्ति में गिरावट भी है, जिसका असर देश की विकास यात्रा पर पड़ सकता है।
विज्ञापन


विकास अर्थशास्त्रियों का कहना है कि शिक्षा, चयन के अधिकार और जागरूकता के साथ खुद ही लोगों में परिवार को सीमित रखने की भावना आती है। इन हालात में लोग छोटे परिवार को सुखी परिवार मानने लगते हैं। लेकिन जिन देशों की आबादी कम है, वहां इससे कई समस्याएं भी खड़ी होती हैँ। मसलन, जन्म दर घटने से समाज में युवा लोगों की तुलना में बुजुर्ग लोगों की संख्या बढ़ने लगती है। अब दक्षिण कोरिया की आबादी में 60 वर्ष से ऊपर की उम्र वाले लोगों की संख्या 24 फीसदी हो गई है। इससे सरकार पर पेंशन और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का बोझ बढ़ गया है। दक्षिण कोरिया सरकार का अनुमान है कि अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा, तो 2067 में देश की आबादी सिर्फ तीन करोड़ 90 लाख रह जाएगी। उसमें 46 फीसदी संख्या 64 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की होगी।

अब दक्षिण कोरिया बड़े परिवार के लिए लोगों प्रोत्साहित करने की नीति अपनाना रहा है। इसके लिए दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाए-इन की सरकार ने एक नई योजना घोषित की है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं को दस लाख वोन (लगभग 920 डॉलर) का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा। साथ ही 12 महीने तक नवजात बच्चे को नकद भत्ता दिया जाएगा। लेकिन आलोचकों का कहना है कि लोग छोटे परिवार इसलिए रख रहे हैं, क्योंकि देश में शिक्षा और आवास का खर्च बहुत बढ़ गया है। सरकार ने इस स्थिति में सुधार की कोई योजना पेश नहीं की है।

देश में जीवन स्तर के बढ़े खर्च का एक परिणाम यह भी बताया गया है कि अब अधिक से अधिक महिलाएं अविवाहित रहना पसंद कर रही हैं। 2018 में एक सर्वे में 22 फीसदी महिलाओं ने ही कहा कि विवाहित जीवन जरूरी है। जबकि एक दशक पहले एक सर्वे में ऐसा मानने वाली महिलाओं की संख्या 47 फीसदी थी। इस बदलती सोच की पुष्टि ठोस आंकड़ों से भी हुई है। 1996 में देश मे लगभग चार लाख 35 हजार शादियां हुई थीं, जबकि 2020 में सिर्फ दो लाख 57 हजार शादियां ही हुईं। 

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें