दक्षिण अफ्रीका के विपक्षी दल ‘इकोनॉमिक फ्रीडम फाइटर्स’ (Economic Freedom Fighters) के नेता जूलियस मालेमा (Julius Malema) ने शनिवार को कहा कि भारतीय मूल के भगोड़े व्यवसायियों अजय, अतुल और राजेश गुप्ता ने देश पर कब्जा नहीं किया, बल्कि वे भ्रष्ट गतिविधियों में लिप्त थे।
इंटरपोल (Interpol) ने जून में 51 वर्षीय राजेश और 53 वर्षीय अतुल गुप्ता के खिलाफ ‘रेड नोटिस’ (Red Notice) जारी किया था। राजेश और अतुल भारतीय मूल (Indian-Origin) के तीन गुप्ता भाइयों में से दो हैं। इन पर आरोप है कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा (Jacob Zuma) के कार्यकाल के दौरान अपनी निकटता का दुरुपयोग कर दक्षिण अफ्रीका के उद्यमों से अरबों रुपये निकाल लिए और दक्षिण अफ्रीका (South Africa) से अपने परिवार के साथ भाग गए थे।
दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने 25 जुलाई को कहा था उसने राजेश गुप्ता और अतुल गुप्ता बंधुओं के दुबई से प्रत्यर्पण के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को औपचारिक आवेदन सौंपा है। दक्षिण अफ्रीका में गुप्ता बंधुओं पर आरोप है कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल आर्थिक लाभ के लिए किया और वरिष्ठ नियुक्तियों को प्रभावित किया।
मालेमा ने ब्लूमफोन्टेन में पार्टी के नौवें स्थापना दिवस के मौके पर राष्ट्रीय उत्सव के दौरान टेलीविजन पर प्रसारित एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘हम यह नहीं कह रहे हैं कि गुप्ता बंधुओं ने देश पर कब्जा कर लिया। उन्होंने देश पर कब्जा नहीं किया। देश पर कब्जा और भ्रष्टाचार में अंतर है। गुप्ता बंधु भ्रष्ट गतिविधियों में लिप्त थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने गुप्ता बंधुओं के आपराधिक गठजोड़ के खिलाफ सफलतापूर्वक लड़ाई लड़ी। जब हर कोई गुप्ता बंधुओं से डरता था, तो हमने गुप्ता बंधुओं का सामना किया और आज हम यहां गर्व के साथ कह सकते हैं कि हमने गुप्ता बंधुओं को हरा दिया।’’
बता दें कि बड़े सार्वजनिक विरोध के बाद गुप्ता बंधु 2018 में दक्षिण अफ्रीका से भाग गए थे और अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस ने तत्कालीन राष्ट्रपति जैकब जूमा को हटा दिया था और सिरिल रामफोसा को कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया गया था। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले गुप्ता बंधुओं पर दक्षिण अफ्रीकी तत्कालीन राष्ट्रपति जैकब जुमा के साथ मिलकर धोखाधड़ी के कई मामले हैं और वे इन दिनों यूएई में निर्वासित जीवन जी रहे हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 2019 में गुप्ता बंधुओं पर "एक महत्वपूर्ण भ्रष्टाचार नेटवर्क के सदस्य" होने का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगा दिया था।
जूता कारोबारी से अरबों के मालिक
गुप्ता परिवार 1990 के दशक में नेल्सन मंडेला कि रिहाई के साथ दक्षिण अफ्रीका में शुरू हुए लोकतंत्र के नए दौर के दौरान सहारनपुर से यहां पहुंचा था। एक जूता स्टोर शुरू करने के बाद उन्होंने वहां के राजनीतिक दलों में घुसपैठ बनाकर सूचना तकनीक, खनन और मीडिया के क्षेत्र में अपना विशाल साम्राज्य कायम कर लिया था। लेकिन पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा के खिलाफ शुरू हुई जांच के दौरान उनके भी तमाम कथित घोटाले सामने आने पर उन्हें दक्षिण अफ्रीका से फरार होना पड़ा था।