सात लाख से भी कम आबादी वाला देश- सोलोमोन आइलैंड्स चीन और अमेरिकी खेमे के देशों के बीच टकराव का नया मोर्चा बन गया है। पिछले दो दिन में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने इस मामले में चीन को कड़ी चेतावनी दी है। उधर ये मामला ऑस्ट्रेलिया में चुनावी मुद्दा भी बन गया है।
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, और न्यूजीलैंड ने कहा है कि चीन और सोलोमन आइलैंड्स के बीच हुआ समझौता एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्वतंत्रता और खुलेपन के लिए एक गंभीर खतरा है। इन देशों ने आशंका जताई है कि इस समझौते के कारण इस क्षेत्र में चीन की सैनिक मौजूदगी बढ़ेगी। अमेरिकी खेमे के देशों में ये अंदेशा इतना गहरा है कि पिछले शुक्रवार को अमेरिका ने अपना एक विशेष उत्तरस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सोलोमन आइलैंड्स भेजा। वहां राजधानी होनिआरा में इस दल की प्रधानमंत्री मानासेह सोगावारे से बातचीत हुई।
पश्चिमी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक अमेरिकी दल ने सोगावारे को इस बारे में कड़ी चेतावनी दी। चीन और सोलोमन आइलैंड्स के बीच हुए समझौते के दस्तावेज को गुप्त रखा गया है। लेकिन इस बारे में लीक होकर जो खबरें छपी हैं, उनके मुताबिक इसके तहत ‘कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद के लिए’ चीन को अपने सुरक्षा बल द्वीपसमूह पर भेजने का अधिकार मिल गया है।
न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटबरी में चीन विशेषज्ञ एनी-मेरी ब्रैडी ने चीन और सोलोमन आइलैंड्स के बीच हुए समझौते को ‘गेम चेंजर’ बताया है। उन्होंने अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी से कहा- ‘इस समझौते का मुख्य निशाना अमेरिका है। इसका मकसद इंडो-पैसिफिक में अमेरिकी रणनीति का मुकाबला करना है।’
इस बीच चीन ने कहा है कि सामाजिक स्थिरता कायम रखने, टिकाऊ विकास को हासिल करने, और सुरक्षा चिंताओं को दूर करने में वह सोलोमन आइलैंड्स की मदद करना जारी रखेगा। सोगावारे ने पिछले हफ्ते कहा था कि चीन और सोलोमन आइलैंड्स के बीच 2019 में राजनयिक संबंध बनने के बाद से दोनों देशों के आपसी रिश्ते मजबूत होते गए हैं।
लेकिन ब्रैडी ने कहा है- ‘इस समझौते से प्रशांत महासागर में मौजूद द्वीपों की सुरक्षा और स्वायत्तता के लिए खतरा पैदा होगा। साथ ही ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की सुरक्षा के लिए भी यह खतरा है।’ सोलोमन आइलैंड्स ऑस्ट्रेलिया से लगभग 1,300 मील दूर है। ये द्वीपसमूह अमेरिका और एशिया के बीच जहाज मार्ग के बीच एक प्रमुख ठिकाना है।