सिंगापुर में भारतीय मूल के पुलिस अधिकारी की मौत के मामले में यहां के कानून एवं गृहमंत्री के. शनमुगम लगातार सख्त रुख अपनाए हुए हैं। इसी क्रम में, शनमुगम ने बताया कि अधिकारी द्वारा मौत से ठीक पहले नस्ली भेदभाव और कार्यस्थल पर प्रताड़ित किए जाने के लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस संभावित कदाचार और अनुशासनात्मक उल्लंघन के तौर पर करेगी।
यह है मामला
शनमुगम ने पिछले साल उवरजा गोपाल की हुई मौत पर संसद में मंत्री स्तरीय बयान देते हुए यह टिप्पणी की। बता दें, 35 वर्षीय अधिकारी 21 जुलाई को यिशुन आवासीय परिसर में एक इमारत के नीचे बेसुध पड़ा पाया गया था। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। बताया जा रहा है कि अधिकारी ने आत्महत्या की थी। उन्होंने 10 से अधिक वर्षों तक पुलिस के साथ सेवा की थी।
अपने वरिष्ठों पर लगाया था आरोप
गोपाल ने एक फेसबुक पोस्ट में दावा किया था कि उन्हें कार्यस्थल पर उनके वरिष्ठों द्वारा तंग किया गया था, उनकी टीम के सदस्यों ने उनके साथ नस्लीय दुर्व्यवहार किया था और उन्होंने मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली। अधिकारी द्वारा लगाए गए आरोपों में कार्यस्थल पर खराब माहौल होने का भी उल्लेख किया गया था। उक्त पोस्ट को बाद में हटा दिया गया था लेकिन इसके कई स्क्रीनशॉट ‘रेडिट’ पर दोबारा डाले गए।अधिकारी ने यह भी लिखा था कि उसने मदद मांगी थी लेकिन उसकी कोई सहायता नहीं की गई।
अनुशासनात्मक उल्लंघन के रूप में होगी जांच
शनमुगम ने सदन को बताया, घटना के बाद से पुलिस ने अपनी नीतियों की समीक्षा की और इन मामलों के लिए दृष्टिकोण की एक रूपरेखा है। उन्होंने कहा कि नस्लीय दुर्व्यवहार या आकस्मिक नस्लवाद से जुड़े मामलों की जांच संभावित कदाचार और एक अनुशासनात्मक उल्लंघन के रूप में की जाएगी । यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस तरह की घटना का रिकॉर्ड हो और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और अधिकारी के बाद के व्यवहार की भी बारीकी से निगरानी की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि पुलिस वार्षिक नैतिकता संगोष्ठी जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से नस्लीय टिप्पणियों या आकस्मिक नस्लवाद के मुद्दों पर अधिकारियों को शामिल करना, संस्कृति को आकार देना और स्पष्ट चर्चा में शामिल होना जारी रखेगी।
एसपीएफ ने कहा कि आरोप निराधार पाए गए। हालांकि, उवराजा की मौत के बाद, शनमुगम ने एसपीएफ को एक और जांच करने और अटॉर्नी-जनरल के चैंबर्स (एजीसी) को निष्कर्षों की समीक्षा करने के लिए कहा। मंगलवार को, शनमुगम ने सदन को बताया कि एजीसी ने एसपीएफ की नवीनतम जांच के निष्कर्षों की समीक्षा की है और निर्धारित किया है कि आगे की कार्रवाई की आवश्यकता नहीं थी।
जांच में एसजीटी उवराजा के कुछ आरोप सही पाए गए। चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, उस समय इसमें शामिल कुछ अधिकारियों को अनुशासित या दंडित किया गया था। मंत्री ने कहा कि लेकिन अन्य आरोप झूठे हैं।
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