जून 2019 में अपनाया गया विवादास्पद कानून - जिसे बिल 21 के रूप में जाना जाता है - क्यूबेक प्रांत में न्यायाधीशों, पुलिस अधिकारियों, शिक्षकों और अधिकार प्राप्त लोक सेवकों को काम के दौरान किप्पा, पगड़ी या हिजाब जैसे प्रतीक पहनने से रोकता है।
भारत के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह ने शनिवार को शीर्ष सिख निकाय और कनाडा के सिख सांसदों से आग्रह किया कि वे देश के क्यूबेक प्रांत में उच्च पदों पर आसीन लोक सेवकों के लिए पगड़ी पर प्रतिबंध का मुद्दा उठाएं।
विज्ञापन
भारत की संसद के पूर्व सदस्य तरलोचन सिंह ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के अध्यक्ष जत्थेदार अकाल तख्त और कनाडा के सिख सांसदों से आग्रह किया कि वे ब्रिटेन के सांसदों के उदाहरण का अनुसरण करें, जिन्होंने सिख प्रतीकों की रक्षा के लिए पगड़ी पर प्रतिबंध के कानून में संशोधन करवाया था।
क्यूबेक प्रांत में पगड़ी या हिजाब पहनने पर प्रतिबंध
जून 2019 में अपनाया गया विवादास्पद कानून - जिसे बिल 21 के रूप में जाना जाता है - क्यूबेक प्रांत में न्यायाधीशों, पुलिस अधिकारियों, शिक्षकों और अधिकार प्राप्त लोक सेवकों को काम के दौरान किप्पा, पगड़ी या हिजाब जैसे प्रतीक पहनने से रोकता है।
विज्ञापन
यह फ्रांस के कानून से भी अधिक गंभीर है- तारलोचन
फरवरी 2024 में, क्यूबेक कोर्ट ऑफ अपील ने कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाले फैसले में प्रांत के विवादास्पद धर्मनिरपेक्षता कानून को बरकरार रखा। अपनी यात्रा के दौरान तरलोचन सिंह ने एक बयान में कहा, यह फ्रांस के कानून से भी अधिक गंभीर है, जहां सरकारी स्कूलों में सिख छात्रों के लिए पगड़ी पहनने पर प्रतिबंध है। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि कनाडा में सिख सांसदों ने अभी तक इस मुद्दे को समुदाय के खिलाफ बड़े भेदभाव के रूप में क्यों नहीं उठाया है।
'कानून में संशोधन करने का अनुरोध करें'
उन्होंने कहा, हम दुनिया में एकमात्र धार्मिक समुदाय हैं, जहां धार्मिक बाध्यता के अनुसार सभी को लंबे बाल रखने की अनुमति है। मैं आप सभी से अपील करता हूं कि क्यूबेक प्रांत के मुख्यमंत्री से इस मामले को फिर से उठाएं और कानून में संशोधन करने का अनुरोध करें। इसमें मदद के लिए कैथोलिक पदानुक्रम से संपर्क किया जा सकता है। ब्रिटेन में, सिखों ने अपने निरंतर प्रयासों से सिख प्रतीकों की रक्षा के लिए इसी तरह के कानूनों में संशोधन करवाया है।