वैश्विक स्तर पर जलवायु संकट ने एक बार फिर खतरे की घंटी बजा दी है। यूरोपीय संघ की प्रमुख निगरानी संस्था कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 जुलाई 2023 के साथ संयुक्त रूप से इतिहास का सबसे गर्म महीना दर्ज किया गया है। इस दौरान दुनिया का औसत वायु तापमान 16.96 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1991-2020 के औसत से 0.85 डिग्री सेल्सियस और पूर्व-औद्योगिक काल (1850-1900) की तुलना में 1.65 डिग्री सेल्सियस अधिक है।
अल नीनो-ग्रीनहाउस गैसें कारण
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह अप्रत्याशित गर्मी जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) के जलने से वायुमंडल में लगातार बढ़ रही ग्रीनहाउस गैसों और भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सक्रिय हो रही मजबूत अल नीनो परिस्थितियों का मिला-जुला नतीजा है।
महासागरों में भी गर्मी का रिकॉर्ड
महासागरों का तापमान भी रिकॉर्ड स्तर पर है। 60 डिग्री दक्षिण से 60 डिग्री उत्तर के बीच गैर-ध्रुवीय महासागरों का औसत सतही तापमान 21.07 डिग्री दर्ज किया। इसने अगस्त 2023 में बने 20.98 डिग्री के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
यूरोप में ऐतिहासिक गर्मी और सूखा
पश्चिमी यूरोप ने अपने इतिहास की सबसे भीषण गर्मी का सामना किया, जिसने 2003 के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया। मई महीने से शुरू हुआ भीषण लू का सिलसिला अगस्त तक जारी रहा। गर्मी के साथ पश्चिमी, मध्य और पूर्वी यूरोप के बड़े हिस्से में गंभीर सूखे की स्थिति बन गई।