सऊदी अरब ने बुधवार को स्पष्ट तौर पर कहा कि उसके तेल क्षेत्र पर हुए हमले के लिए ईरान के जिम्मेदार होने में उसे कोई शक नहीं है। सऊदी अरब ने कहा कि हमला उत्तर दिशा की तरफ से किया गया था, लेकिन हमले की वास्तविक जगह अभी तक चिह्नित की जानी बाकी है।
बता दें कि सऊदी अरब के पूर्वी छोर में अरामको के दो तेल संयंत्रों पर 18 ड्रोन और सात क्रूज मिसाइलों से हमला करते हुए उसे तबाह कर दिया था। इससे सऊदी तेल उत्पादन घटकर आधा रह गया है। इन ड्रोन और मिसाइलों के टुकड़े घटनास्थल से बरामद हुए थे। इसके बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा, निसंदेह यह हमला ईरान प्रायोजित था। हम वास्तविक लांच प्वाइंट को जानने की कोशिश करेंगे।
हालांकि, मलिकी ने इस बात का स्पष्ट जवाब नहीं दिया कि क्या सऊदी अरब को यकीन है कि आखिरकार ईरान ही अपराधी निकलेगा। मलिकी ने महज इतना ही जवाब दिया कि हमें यकीन है कि हथियारों को छोड़े जाने की जगह तलाश ली जाएगी।
उधर, संयुक्त राष्ट्र के राजनयिक ने कहा कि घटना की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए विशेषज्ञों का दल सऊदी अरब पहुंच गया है। उन्होंने इससे ज्यादा ब्योरा नहीं दिया। दूसरी तरफ, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो पहले ही स्पष्ट तौर पर इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। हालांकि ईरान ने स्विट्जरलैंड के दूतावास के जरिये अमेरिका को एक राजनयिक नोट भेजकर सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों पर हमले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है।
ट्रंप ने ब्रिटिश पीएम के साथ की सऊदी हमले पर चर्चा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने बुधवार को आपस में वार्ता की। डाउनिंग स्ट्रीट के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच चर्चा का विषय सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हमला रहा। दोनों ने इस मामले में ‘संयुक्त राजनयिक प्रतिक्रिया’ को लेकर बात की। हालांकि डाउनिंग स्ट्रीट ने अपने बयान में सैन्य विकल्प का जिक्र नहीं किया।