विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच तनाव तब तक जारी रहेगा जब तक सीमा पर अग्रिम चौकियों पर सेना तैनात रहेगी। उन्होंने कहा कि सीमा को शांतिपूर्ण और शांत बनाए रखने के लिए किए गए समझौतों का चीन ने 2020 में उल्लंघन किया। जयशंकर अमेरिका में कार्नेगी एंडोमेंट के कार्यक्रम में बोल रहे थे।
भारत-चीन संबंधों पर विदेश मंत्री ने कहा, चीन के साथ रिश्तों की बात कोई चार साल की नहीं बल्कि यह एक लंबी कहानी है, लेकिन संक्षेप में कहें तो सीमा को शांतिपूर्ण और शांत बनाए रखने के लिए हमारे बीच कुछ समझौते हैं। चीन की ओर से 2020 में उन समझौतों का उल्लंघन किया गया। क्योंकि हमने अपनी सेनाओं की अग्रिम तैनाती की है, इसलिए परिणामस्वरूप तनाव है। जब तक उन अग्रिम तैनाती का मसला हल नहीं होता और सैनिकों की वापसी नहीं होती तब तक तनाव जारी रहेगा। जयशंकर ने कहा कि यदि तनाव जारी रहता है, तो यह बाकी संबंधों पर स्वाभाविक रूप से असर डालता है।
वैश्विक विनिर्माण में चीन की हिस्सेदारी 31-32 फीसदी
चीन के साथ कारोबार के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि वैश्विक विनिर्माण में चीन की हिस्सेदारी लगभग 31-32 फीसदी है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि पिछले कुछ दशकों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मुख्य रूप से पश्चिमी नेतृत्व वाले देशों ने आपसी लाभ के लिए चीन के साथ सहयोग करने का विकल्प चुना है। इसलिए, आज, किसी भी देश के लिए, यदि आप उपभोग में लगे हैं, या किसी प्रकार के विनिर्माण में लगे हैं, तो चीन से माल मंगाना अपरिहार्य है। और यदि आप विनिर्माण भी कर रहे हैं, तो आपके बहुत सारे घटक और अर्ध-प्रसंस्कृत सामग्रियां, वहीं से मिलती हैं। इसलिए एक स्तर पर चीन के साथ व्यापार, राजनीतिक या बाकी संबंधों से स्वायत्त है।
डाटा संवेदनशील दुनिया में जोखिम को कम करना सबसे जरूरी
जयशंकर ने कहा, क्योंकि हम पहले तकनीक पर थे इसलिए आज हम अपने डाटा प्रवाह के प्रति बहुत संवेदनशील हैं। ऐसे में एक बेहद अधिक डाटा-संवेदनशील दुनिया में, यह देखना महत्वपूर्ण है कि आपके जोखिम क्या हैं। आप इसे कैसे कम करते हैं, आप इसे कैसे संतुलित करते हैं।
अगस्त में दोनों पक्षों के बीच हुआ था शांति समझौता
इससे पहले अगस्त में, भारत और चीन ने बेजिंग में भारत-चीन सीमा मामलों (डब्ल्यूएमसीसी) पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र की 31वीं बैठक की थी। दोनों पक्षों ने संयुक्त रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में जमीन पर शांति बनाए रखने का फैसला किया था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रासंगिक द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल के साथ दोनों पक्षों ने एलएसी स्थिति पर विचारों का 'स्पष्ट, रचनात्मक और दूरदर्शी' आदान-प्रदान किया और राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से संपर्क तेज करने पर भी सहमति व्यक्त की।