विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुखों के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। जयशंकर एससीओ के राष्ट्राध्यक्ष परिषद की बैठक में हिस्सा लेने मास्को पहुंचे हैं। रूसी राष्ट्रपति के साथ मुलाकात के बारे में एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा, "आज दोपहर एससीओ प्रतिनिधिमंडल के अन्य प्रमुखों के साथ राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की।"
क्रेमलिन में हुई इस बैठक में रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तीन, ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ, बेलारूस के प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर तुर्चिन, कजाकिस्तान के प्रधानमंत्री ओलजस बेक्टेनोव, किर्गिस्तान के प्रधानमंत्री अदिलबेक कासिमालीयेव, ताजिकिस्तान के कोखिर रसूलजोदा और उज्बेकिस्तान के अब्दुल्ला अरिपोव के साथ ही पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार और एससीओ महासचिव नूरलान येरमेकबायेव भी शामिल हुए।
पीएम मोदी संग पुतिन करेंगे दिसंबर में शिखर वार्ता
जयशंकर ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ सोमवार को व्यापक बातचीत की। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दोनों पक्ष राष्ट्रपति पुतिन की 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक शिखर वार्ता के लिए 5 दिसंबर के आसपास भारत आने की उम्मीद है।
एससीओ से इतर, जयशंकर ने मंगोलिया के प्रधानमंत्री गोम्बोजाविन जंदनशतर और कतर के प्रधानमंत्री/विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से भी मुलाकात की। उन्होंने एससीओ शासनाध्यक्षों की बैठक की मेजबानी के लिए रूसी प्रधानमंत्री मिशुस्तीन का धन्यवाद किया।
'एससीओ को बढ़ाना होगा अपना प्रभाव', बोले पुतिन
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को सदस्य देशों के बीच आर्थिक विकास और सहयोग के लिए एशिया के एक संगठन के रूप में एससीओ की विश्वसनीयता और प्रभाव को बढ़ाने का आह्वान किया। पुतिन ने यह टिप्पणी रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तीन की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय बैठक के बाद क्रेमलिन में एससीओ के शासनाध्यक्षों के साथ एक बैठक के दौरान की।
पुतिन ने कहा, "हम सभी का एक साझा लक्ष्य है: यूरेशियाई महाद्वीप और वास्तव में वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े क्षेत्रीय संगठनों में से एक के रूप में एससीओ की विश्वसनीयता और प्रभाव को बढ़ाना। स्वाभाविक रूप से, सरकारों की ठोस व्यावहारिक कार्य स्थापित करने और संगठन के सदस्य देशों के बीच बहुआयामी सहयोग का विस्तार करने में विशेष भूमिका है।"