नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। बिक्रम चंद ‘बिप्लव’ के नेतृत्व वाले गुट ने आधिकारिक तौर पर चुनाव आयोग में अपनी पार्टी का पंजीकरण कराया लिया है। दल को फिर से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी) के रूप में स्थापित कर दिया है। लाल गुलाब चुनाव निशान मिलने के साथ ही बिप्लव गुट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब पूर्ण रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब नेपाल में मार्च 2026 के आम चुनाव के लिए राजनीतिक तैयारियां तेज हैं।
बिप्लव गुट ने यह कदम तब उठाया है जब नेपाल अगले वर्ष 5 मार्च को होने वाले आम चुनावों की तैयारी में जुटा है। चुनाव आयोग में औपचारिक पंजीकरण के बाद बिप्लव ने कहा कि उनकी पार्टी युवाओं के मुद्दों भ्रष्टाचार, राजनीतिक अव्यवस्था और भाई-भतीजावाद को चुनावी एजेंडा बनाएगी। यह वही धड़ा है जो 2006 में प्रचंड के मुख्यधारा की राजनीति में आने के बाद टूटकर भूमिगत चला गया था और 2020 में सरकार के साथ शांति समझौता कर वापस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लौटा।
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प्रचंड से टूटकर बना धड़ा
मूल माओवादी आंदोलन के प्रमुख रहे प्रचंड ने वर्षों पहले अपनी पार्टी को कई छोटे संगठनों को मिलाकर नया नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी बनाया और ‘माओवादी’ नाम लगभग छोड़ दिया। इसी के बाद बिप्लव ने पुराने नाम सीपीएन-माओवादी को बरकरार रखते हुए अपनी अलग राजनीतिक इकाई का गठन किया। लंबे समय तक चलाए गए उनके सशस्त्र और राजनीतिक गुप्त अभियान 2020 में खत्म हुए जब उन्होंने सरकार के साथ औपचारिक शांति करार पर हस्ताक्षर किया।
चुनावी तैयारियां तेज
नेपाल चुनाव आयोग ने 17 नवंबर से पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की है और सभी दलों को 26 नवंबर तक आवेदन जमा करना है। अब तक 12 राजनीतिक दल अपने दस्तावेज जमा करा चुके हैं, जिनमें बिप्लव का धड़ा भी शामिल है। उनका कहना है कि वे आगामी आम चुनावों में सक्रिय और मजबूत दावेदारी पेश करेंगे। लाल गुलाब चुनाव चिह्न उनके राजनीतिक संदेश बदलाव, संघर्ष और उम्मीद का प्रतीक बताया जा रहा है।
यह चुनाव ऐसे वक्त में हो रहा है जब नेपाल पिछले दो महीनों से राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। सोशल मीडिया प्रतिबंध को लेकर हुए व्यापक प्रदर्शनों में 76 लोगों की मौत के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को 9 सितंबर को हटना पड़ा। 12 सितंबर को सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। ऐसे माहौल में बिप्लव धड़े की सक्रिय एंट्री नेपाल के बदलते राजनीतिक समीकरणों पर सीधा असर डाल सकती है।
युवाओं का समर्थन पाने की कोशिश
चुनाव आयोग भवन से निकलते समय बिप्लव ने कहा कि उनकी पार्टी उन युवाओं की आवाज बनेगी जो व्यवस्था परिवर्तन चाहते हैं। उन्होंने खुद को जेन-जेड आंदोलनों का समर्थक बताया और भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडा को अपनी प्राथमिकता कहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चुनाव नेपाल में अगली राजनीति की दिशा तय करेगा और बिप्लव गुट अपनी नई पहचान के साथ युवाओं में नई पकड़ बनाने की कोशिश करेगा।