इस हफ्ते की शुरुआत में ये खबर सूत्रों के हवाले से आई थी कि रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन पार्किंसन रोग से पीड़ित हो गए हैं। लेकिन तब क्रेमलिन (रूस सरकार का मुख्यालय) ने इस चर्चा को बकवास बताया था। लेकिन उससे ये चर्चा थमी नहीं है। बल्कि दुनिया भर के मीडिया में इस बारे में नई रिपोर्टें आई हैं। उनमें से कुछ में यह बताया गया है कि पुतिन ने सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया बाकायदा शुरू कर दी है। अगले साल मध्य तक वे राजकाज से अपने को अलग कर लेंगे।
ये विडंबना ही है कि रूस में राष्ट्रपति के कार्यकाल को लेकर हुए जनमत संग्रह के कुछ महीनों के बाद ही ये खबर चर्चित हुई है। ये जनमत संग्रह पुतिन ने राष्ट्रपति के कार्यकाल पर लगी पाबंदियों को हटाने लिए कराया था। जनमत संग्रह में रूस की जनता ने उस प्रावधान को भारी बहुमत से पारित कर दिया, जिसके तहत अब पुतिन 2036 तक राष्ट्रपति रह सकते हैं।
पहले ये प्रावधान था कि कोई व्यक्ति लगातार दो कार्यकाल से अधिक राष्ट्रपति नहीं रह सकता। नए संशोधन के तहत ये सीमा अब छह साल के चार कार्यकाल तक बढ़ा दी गई। पुतिन का मौजूदा कार्यकाल 2024 में खत्म होगा। लेकिन अब जारी चर्चाएं अगर सच हैं, तो पुतिन ये कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाएंगे।
मास्को स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस से जुड़े राजनीति शास्त्री वलेरी सोलोवेय ने मास्को रेडियो पर कहा कि पुतिन का इरादा 2021 में अपना पद छोड़ देने का है। सोलोवेय ने संकेत दिया कि पुतिन को पार्किंसन रोग है और उनकी प्रेमिका अलीना काबायेवा ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे नए साल में रिटायर हो जाएं। आम चर्चा रही है कि पुतिन के निजी जीवन में काबायेवा का बहुत प्रभाव रहता है।
ब्रिटिश अखबार ‘सन’ में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पुतिन में पार्किंसन रोग के लक्षण 2015 में नजर आने लगे थे। अखबार ने नीदरलैंड्स स्थित रेडबॉन्ड यूनिवर्सिटी मेडिकल केयर के न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के शोधकर्ताओं के हवाले से छापा है कि उस समय ये गौर किया गया था कि चलते वक्त पुतिन का बायां हाथ नहीं हिल रहा है। रिवोल्विंग चेयर पर बैठते हुए भी कुर्सी की दिशा बदलने में उन्हें कष्ट होने के लक्षण दिखे थे।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने हाल में रूस में पास किए गए कुछ कानूनों का जिक्र किया है और उसका संबंध पुतिन की सेहत से जोड़ा है। इन कानूनों के तहत पूर्व राष्ट्रपतियों को कानूनी कार्रवाइयों से मुक्ति प्रदान की गई है। एक नए कानून के तहत पूर्व राष्ट्रपति पर ताउम्र कोई आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता।
एक दूसरे नए कानून के जरिए व्यवस्था की गई है कि पूर्व राष्ट्रपति जीवन भर के लिए ड्यूमा (रूस की संसद) के स्थायी सदस्य रहेंगे। पुतिन की लोकप्रियता के देखते हुए ये अंदाजा लगाना कठिन है कि अगले चुनाव में हार जाने की आशंका के कारण पुतिन ने ये कानून पास कराए हैं।
रूस के विपक्षी नेता गेन्नादी गुडकोव ने भी कहा है कि पुतिन संभवतया पद छोड़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने एक रूसी पत्रकार से कहा कि पुतिन ऐसा स्वेच्छा से कर रहे हैं या बीमारी के कारण यह साफ नहीं है, लेकिन सत्ता हस्तांतर की प्रक्रिया शुरू हो जाने के संकेत हैं। गुडकोव ने दावा किया कि पुतिन अब पहले की तरह बोल भी नहीं पाते हैं।
सियासी हलकों में पुतिन के बाद रूस के भविष्य को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। पुतिन की पार्टी में कोई ऐसा नहीं है, जिसे पुतिन का उत्तराधिकारी समझा जाए। देश में विपक्ष बेहद कमजोर है। ऐसे में ये आशंका गहरा रही है कि रूस को कुछ समय तक राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजरना पड़ सकता है।