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Mikhail Gudkov: युद्ध, आरोप और अंत...,जानें यूक्रेन में मारे गए रूस के मेजर जनरल मिखाइल गुडकोव की कहानी

Thu, 03 Jul 2025 08:13 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को

सार

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस को बड़ा झटका लगा है। रूस के ताकतवर सैन्य अधिकारी मेजर जनरल मिखाइल गुडकोव की मौत कुर्स्क में हो गई। वह पहले 155वीं नेवल इंफेंट्री ब्रिगेड के कमांडर रहे, जिस पर बुचा नरसंहार जैसे गंभीर आरोप हैं। हाल ही में उन्हें रूसी नौसेना का डिप्टी हेड बनाया गया था।
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रूस का झंडा - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस को एक बड़ा झटका लगा है। रूस के वरिष्ठ नौसेना अधिकारी और सैन्य कमांडर मेजर जनरल मिखाइल गुडकोव की मौत हो गई है। गुडकोव रूस के कुर्स्क इलाके में मारा गए, जो यूक्रेन की सीमा से सटा हुआ है। उनकी मौत को लेकर रूसी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है। गुडकोव का नाम पहले भी चर्चा में रहा है क्योंकि वो उस सैन्य ब्रिगेड के प्रमुख थे, जिस पर यूक्रेन में नरसंहार जैसे गंभीर आरोप लगे थे। ऐसे में रूस के मेजर जनरल मिखाइल गुडकोव की मौत ने एक बार फिर यूक्रेन युद्ध के खौफनाक पहलुओं को सामने ला दिया है।
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रूसी सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए के मुताबिक, मिखाइल गुडकोव 2 जुलाई 2025 को कुर्स्क क्षेत्र में 'सैन्य कार्रवाई' के दौरान मारे गए। हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गुडकोव एक सटीक यूक्रेनी मिसाइल हमले में मारे गए। रूसी सरकार ने इस पर कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया है। ऐसे में आइए जानते हैं कि युद्ध और आरोपों में घिरी गुडकोव की जिंदगी की का कैसे अंत हो गया.

मार्च 2025 में मिली थी बड़ी जिम्मेदारी
मिखाइल गुडकोव को मार्च 2025 में रूसी नौसेना का डिप्टी हेड नियुक्त किया गया था। यह प्रमोशन उस समय दिया गया जब उनके सैन्य रिकॉर्ड पर पहले से ही कई सवाल खड़े थे। इससे पहले, गुडकोव रूस की बेर इनफेमस 155वीं नेवल इंफेंट्री ब्रिगेड के कमांडर थे।
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155वीं ब्रिगेड पर नरसंहार के आरोप
गुडकोव की कमान वाली 155वीं ब्रिगेड पर यूक्रेन युद्ध के दौरान गंभीर आरोप लगे हैं। इस ब्रिगेड का नाम सबसे ज्यादा बुचा नरसंहार में आया। साल 2022 में जब यूक्रेनी सेना ने कीव के पास बुचा इलाके को रूसी कब्जे से छुड़ाया, तो वहां सामूहिक कब्रें और आम नागरिकों के शव मिले थे। इस घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। 

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अन्य युद्धों में भी रही ब्रिगेड की विफलता
गुडकोव की ब्रिगेड केवल बुचा ही नहीं, बल्कि इरपिन, पावलिव्का और वुहलेदार जैसे इलाकों में भी युद्ध में बुरी तरह असफल रही। ब्रिगेड को बार-बार हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उसे बार-बार दोबारा तैयार कर युद्ध में भेजना पड़ा। विशेषज्ञों ने इसे क्रेमलिन की सैन्य विफलता का प्रतीक बताया। नरसंहार के आरोप और ब्रिगेड की कुछ विफलता के बाद जनरल की छवि विवादित कही जाने लगी. हालांकि रूस के लिए उन्होंने ओर उनकी सेना काफी ताकतवर मानी जाती रही.

रूस ने दी 'शहादत' को सलामी
गुडकोव की ताकत और उनकी सेना के शौर्य को देखते हुए उनकी मौत को 'वीरता का सम्मान' मिला। रूस के सुदूर-पूर्वी प्राइमोरी क्षेत्र के गवर्नर ओलेग कोझेम्याको ने गुडकोव को 'मजबूत जज्बे वाला योद्धा' बताया। उन्होंने कहा  कि जनरल ने आखिरी सांस तक अपने सैनिकों के बीच जाकर ड्यूटी निभाई।

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रूस के लिए बड़ी क्षति
यूक्रेन पर रूस के पूर्ण युद्ध की शुरुआत के बाद से कई वरिष्ठ रूसी अधिकारियों की मौत हुई है। लेकिन मिखाइल गुडकोव उन चुनिंदा अधिकारियों में से थे, जो इतनी ऊंची पोस्ट पर रहते हुए मारे गए। उनकी मौत रूस के सैन्य ढांचे के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।

गुडकोव की मौत ने ये भी साफ कर दिया कि युद्ध अब सिर्फ यूक्रेन तक सीमित नहीं रहा। कुर्स्क, बेलगोरोद जैसे रूसी सीमा क्षेत्रों पर भी हमले बढ़ गए हैं। यूक्रेन की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों में तेजी आई है, जिससे रूस के अंदर भी अस्थिरता बढ़ रही है। गुडकोव की मौत इसी बढ़ती असुरक्षा का बड़ा उदाहरण बन गई है।



 
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