विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के देखरेख में ऐसे देशों को पहचानने का काम तेजी से जारी है, जो रूस के दुश्मन हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस इस लिस्ट को सार्वजनिक तो नहीं करेगा, लेकिन उन देशों के प्रति कठोर नीति जरूर बनाएगा। इसमें ज्यादातर देश यूरोप के होंगे। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही राष्ट्रपति पुतिन ने उन देशों के विदेशी राजनयिक मिशनों में काम करने वाले रूसियों की संख्या को सीमित करने के लिए एक डिक्री पर हस्ताक्षर किया, जिनके संबंध रूस के प्रति मित्रतापूर्ण नहीं है।
इन दिनों कई यूरोपीय देशों के साथ रूस का कूटनीतिक युद्ध जारी है। पिछले एक महीने के अंदर अमेरिका, स्वीडन, रोमानिया, चेक रिपब्लिक और इटली ने अमेरिकी राजनयिकों को अपने देश से निकाला है, जिसके जवाब में रूस ने भी इन देशों के राजनयिकों को अवांछित घोषित कर दिया। चेक रिपब्लिक ने तो रूसी अधिकारियों के ऊपर विस्फोट में शामिल होने का आरोप लगाया है।
रूस और अमेरिका एक दूसरे पर एक के बाद एक प्रतिबंध लगा रहे हैं। जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद रूस ने चुनाव में रूसी हस्तक्षेप और टॉप सीक्रेट मिलिट्री फाइल्स को चुराने के लिए हैकिंग का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिका ने रूस के 10 राजनयिकों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया था, जिसके बाद रूस ने अमेरिका से 10 राजनयिकों को निकाल दिया था।
अमेरिका का करीबी होने के बाद भी भारत का रूस के साथ संबंध बहुत अच्छे हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि जब हाल में ही भारत कोरोना के कहर से जूझ रहा था, तब सबसे पहले रूस ने ही मदद की पेशकश की। इतना ही नहीं, उसने भारत को तत्काल रेमडेसिवीर इंजेक्शन और ऑक्सीजन की सप्लाई करने का भी ऐलान कर दिया।
दूसरा तथ्य यह है कि अमेरिका के लाख धमकियों के बावजूद भारत ने रूस के साथ एस-400 मिसाइल सिस्टम की डील को रद्द नहीं किया। अगर कोरोना से हालात सामान्य रहे तो इस साल के अंत में पुतिन दिल्ली का दौरा कर सकते हैं। ऐसे में भारत के इस लिस्ट में शामिल होने की कोई भी उम्मीद नहीं है।