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कदम: अमेरिका-यूरोप से तनाव के बीच रूस का बड़ा फैसला, बना रहा अपने दुश्मनों की सूची

Thu, 29 Apr 2021 03:32 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को

सार

विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के देखरेख में ऐसे देशों को पहचानने का काम तेजी से जारी है, जो रूस के दुश्मन हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस इस लिस्ट को सार्वजनिक तो नहीं करेगा, लेकिन उन देशों के प्रति कठोर नीति जरूर बनाएगा। इसमें ज्यादातर देश यूरोप के होंगे।
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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एक ओर जहां दुनियाभर के देश कोरोना महामारी के प्रकोप से बचने के उपाय खोज रहे हैं तो वहीं रूस अपने दुश्मन देशों की सूची बनाने में व्यस्त है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विदेश मंत्रालय से ऐसे देशों की सूची बनाने को कहा है, जो रूस के प्रति दुश्मनी का भाव रखते हैं। इसके बाद रूस ने अपने दुश्मन देशों की लिस्ट जारी करने का एलान कर दिया।

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यूरोपीय देशों के साथ बढ़ रहा रूस का तनाव
बता दें कई मुद्दों को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ रूस का तनाव बढ़ता जा रहा है। एक सरकारी न्यूज एजेंसी को दिए साक्षात्कार में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि यह सूची जल्द ही जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा, ‘दोस्त देशों के लिए हमने पहले से मापदंड तय करके रखे हुए हैं। सरकार के पास विशिष्ट निर्देश हैं, इस कार्य में जो मापदंड हैं, वे स्पष्ट हैं। ऐसे में मुझे लगता है हमें लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।’

डिक्री पर हस्ताक्षर

विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के देखरेख में ऐसे देशों को पहचानने का काम तेजी से जारी है, जो रूस के दुश्मन हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस इस लिस्ट को सार्वजनिक तो नहीं करेगा, लेकिन उन देशों के प्रति कठोर नीति जरूर बनाएगा। इसमें ज्यादातर देश यूरोप के होंगे। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही राष्ट्रपति पुतिन ने उन देशों के विदेशी राजनयिक मिशनों में काम करने वाले रूसियों की संख्या को सीमित करने के लिए एक डिक्री पर हस्ताक्षर किया, जिनके संबंध रूस के प्रति मित्रतापूर्ण नहीं है।

कूटनीतिक युद्ध जारी

इन दिनों कई यूरोपीय देशों के साथ रूस का कूटनीतिक युद्ध जारी है। पिछले एक महीने के अंदर अमेरिका, स्वीडन, रोमानिया, चेक रिपब्लिक और इटली ने अमेरिकी राजनयिकों को अपने देश से निकाला है, जिसके जवाब में रूस ने भी इन देशों के राजनयिकों को अवांछित घोषित कर दिया। चेक रिपब्लिक ने तो रूसी अधिकारियों के ऊपर विस्फोट में शामिल होने का आरोप लगाया है।

रूस और अमेरिका एक दूसरे पर एक के बाद एक प्रतिबंध लगा रहे हैं। जो  बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद रूस ने चुनाव में रूसी हस्तक्षेप और टॉप सीक्रेट मिलिट्री फाइल्स को चुराने के लिए हैकिंग का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिका ने रूस के 10 राजनयिकों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया था, जिसके बाद रूस ने अमेरिका से 10 राजनयिकों को निकाल दिया था।
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भारत और रूस के संबंध पर नजर

अमेरिका का करीबी होने के बाद भी भारत का रूस के साथ संबंध बहुत अच्छे हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि जब हाल में ही भारत कोरोना के कहर से जूझ रहा था, तब सबसे पहले रूस ने ही मदद की पेशकश की। इतना ही नहीं, उसने भारत को तत्काल रेमडेसिवीर इंजेक्शन और ऑक्सीजन की सप्लाई करने का भी ऐलान कर दिया।

दूसरा तथ्य यह है कि अमेरिका के लाख धमकियों के बावजूद भारत ने रूस के साथ एस-400 मिसाइल सिस्टम की डील को रद्द नहीं किया। अगर कोरोना से हालात सामान्य रहे तो इस साल के अंत में पुतिन दिल्ली का दौरा कर सकते हैं। ऐसे में भारत के इस लिस्ट में शामिल होने की कोई भी उम्मीद नहीं है।
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