तीन साल से ज्यादा समय से चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका और यूरोप ने नई पहल की है। रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुश्नर बर्लिन पहुंचे। आइए जानते है कि क्या अब रूस-यूक्रेन संघर्ष थम जाएगा और अगर नहीं तो अभी भी क्या-क्या चुनौतियां बनी हुई है?
तीन साल से ज्यादा समय से चल रहे रूस-यूक्रेन संघर्ष दिन-प्रतिदिन और खतरनाक रूप लेता हुआ दिख रहा है। ऐसे में अब दोनों तरफ से जारी हमलों के बीच इस संघर्ष को खत्म करने और एक समझौते को पक्का करने के मकसद से बातचीत के एक और दौर के लिए अमेरिकी दूत रविवार सुबह बर्लिन पहुंचे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके जमाई जैरेड कुश्नर को बर्लिन शहर के बीचों-बीच देखा गया।
मामल में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि आने वाले दिनों में यूक्रेन, अमेरिका और यूरोपीय अधिकारी बर्लिन में कई बैठकें करेंगे। जेलेंस्की ने शनिवार रात देश को संबोधित करते हुए कहा कि ट्रंप के दूतों और यूरोपीय नेताओं के साथ राजनीतिक समझौते पर चर्चा होगी ताकि युद्ध खत्म हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि शांति के लिए सबसे जरूरी है कि रूस फिर से यूक्रेन पर हमला न करे।
डोनेट्स्क को लेकर कहां फस रहा मामला?
संघर्ष यूरोप के लिए कैसे बना सिर का दर्द?
दूसरी ओर रूस और यूक्रेन संघर्ष यूरोप के लिए भी सिर का दर्द बनता जा रहा है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि यूरोप में पैक्स अमेरिका का दौर अब लगभग खत्म हो गया है।