सोमवार को यूक्रेन-रूस युद्ध का पांचवां दिन है। दोनों तरफ से भीषण जंग जारी है। रूस ने यूक्रेन के शहर कीव, खारकीव, सुमी पर भीषण बम बरसाए हैं। रूसी बमों से बचने के लिए यूक्रेन के कई गांव खाली हो गए हैं। राजधानी कीव में एयर रेड अलर्ट जारी हो गया है। रूस की तमाम कोशिशों के बाद यूक्रेन ने रूसी सेना को पिछले चार दिनों से कीव पर कब्जा जमाने में कामयाब नहीं होने दिया है। रूसी हमलों में यूक्रेन के 352 आम नागरिकों की मौत हुई है। इसमें 14 बच्चे भी शामिल हैं। इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सोमवार को यूक्रेन पर रूस के हमले के मुद्दे पर 193 सदस्यीय महासभा का एक आपातकालीन विशेष सत्र बुलाया है।
यूएन महासभा का विशेष आपात सत्र बुलाने के लिए रविवार को एक मतदान के जरिए रास्ता साफ हुआ है। आपात सत्र बुलाने की प्रक्रिया के समर्थन में 11 मत पड़े। रूस ने इसके खिलाफ मतदान किया। वहीं चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतिहास में यह 11वां मौका होगा, जब विशेष आपात बैठक बुलाई गई है।
आपात बैठक कब बुलाई जा सकती है?
साल 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद दुनिया में शांति की बहाली के लिए तब 50 देशों के प्रतिनिधियों ने मिलकर एक चार्टर पर हस्ताक्षर किए और एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था की नींव रखी गई, जिसे आज संयुक्त राष्ट्र कहते हैं। इसके छह अंग हैं, जिनमें से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्राथमिक जिम्मेदारी दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की है, जिसके लिए वो प्रभावित देशों में पीस कीपिंग फोर्स भेजते हैं।