लगातार यूक्रेन के शहरों में रूस की ओर से मिसाइल हमले किए जा रहे हैं। अब तक यूक्रेन के 10 से ज्यादा शहर बर्बाद हो गए हैं। हवाई हमले में इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं। लोग मारे जा रहे हैं और जो बच गए हैं वे अपनी जान बचाते भाग रहे हैं।
रूस-यूक्रेन के बीच जंग का आज 9वां दिन है। रूसी सेना यूक्रेन को चारों ओर से घेर रही है। यूक्रेन के कई शहरों पर रूसी सेना ने कब्जे का दावा किया है। इस बीच जपोरिजिया में परमाणु संयंत्र पर भी रूसी सेना ने हमला बोलकर नियंत्रण कर लिया है। यह यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है। यूक्रेन की 25 से 30 फीसदी परमाणु ऊर्जा की इसी परमाणु संयंत्र से आपूर्ति की जाती है। 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से अब तक सैंकड़ों नागरिकों और सैनिकों की जान जा चुकी है। वहीं करीब 10 लाख लोग यूक्रेन छोड़ चुके हैं।
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यूक्रेन की तरफ से युद्ध को रोकने की हर संभव कोशिश की जा रही है। इसी को लेकर गुरुवार को यूक्रेन और रूस के बीच शांति कायम रखने के लिए दूसरे दौर की वार्ता हुई, लेकिन इसमें कोई हल नहीं निकल सका। यूक्रेन-बेलारूस सीमा पर इस सप्ताह की शुरुआत में रूसी और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडलों के बीच पहले दौर की बातचीत हुई, लेकिन यह वार्ता विफल हो गई थी।
हालांकि दूसरे दौर की वार्ता के दौरान इस बात की झलक देखने को मिली कि रूस से मुकाबला करने के लिए यूक्रेनवासी किस तरह तैयार हैं? हर पल के संशय और आशंका के बीच वे दुश्मन के हमले को लेकर भी चौकन्ने हैं। यूक्रेन के वार्ताकार और राष्ट्रपति के सलाहकार मिखाइलो पोडोलीक ने वार्ता की मेज पर बैठे प्रतिनिधिमंडलों की एक तस्वीर ट्वीट की। इस तस्वीर में यूक्रेन के वार्ताकर सेना की वर्दी में दिख रहे थे और सर्दियों के जैकेट पहने हुए थे। जबकि रूसियों ने सूट और टाई पहनी थी।
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सांसद डेविड अरखामिया के साथ वार्ता के लिए जाते मिखाइलो पोडोलीक
- फोटो : Twitter : @Podolyak_M
पोडोलीक ने उससे पहले सांसद डेविड अरखामिया जो वार्ताकारों की टीम में शामिल थे, उनके साथ अपनी एक तस्वीर पोस्ट की जिसमें वे सैन्य वर्दी में हेलीकॉप्टर के केबिन में दिखाई दे रहे हैं।
वार्ताकारों से पहेल कई यूक्रेनी नागरिकों को भी सैनिकों की वर्दी में देखा गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की अपील पर आम नागरिकों ने भी हथियार उठा लिए हैं।
50 हजार यूक्रेनी नागरिक स्वदेश लौट चुके हैं
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक तरफ लोग जहां जंग के डर से दूसरे देशों में पलायन कर रहे हैं वहीं, मातृभूमि के प्रति प्रेम के जज्बे की वजह से और रूस को करारा जवाब देने के लिए 50 हजार यूक्रेनी नागरिक स्वदेश लौट आए हैं। इन 50 हजार लोगों में से 80 फीसदी लोग 18 से 60 साल की उम्र हैं।
यूक्रेनी बॉर्डर सिक्युरिटी एजेंसी के अनुसार पश्चिमी लवीव बॉर्डर चेक प्वाइंट पर लोगों ने एंट्री रजिस्ट्रेशन कराया है। रिपोर्ट के मुताबिक स्वदेश लौटने वाले ये सभी लोग सेना, राहत एवं बचाव कार्यों में शामिल होंगे।
यूक्रेन में जारी जंग के दौरान तैनात एक जवान।
- फोटो : PTI
16 हजार पूर्व सैनिक भी यूक्रेन आएंगे
यूक्रेन को रूसी कब्जे से बचाने के लिए कई पूर्व सैनिक भी अपने देश लौटने वाले हैं। यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि करीब 16 हजार पूर्व सैनिक भी यूक्रेन पहुंच रहे हैं।
विदेशी भी दे सकते हैं यूक्रेन में सेवा
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की अपने देश को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। अपने नागरिकों से मदद मांगने के बाद उन्होंने विदेशी वॉलिंटियर्स से भी मदद की गुहार लगाई है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय लीजन का गठन किया है। जेलेंस्की ने एक बयान में कहा, ‘यह हमारे देश के लिए आपके समर्थन का प्रमुख सबूत होगा।’
इसमें दुनिया भर के लोगों को यूक्रेन में अपनी सेवाएं देने के लिए आमंत्रित किया गया है। विदेशियों के लिए सशस्त्र बलों में सैन्य सेवा देने पर बने 2016 के कानून के अनुसार, विदेशी यूक्रेन के सशस्त्र बलों और प्रादेशिक रक्षा बलों के लिए स्वयंसेवा कर सकते हैं।
राष्ट्रपति की वेबसाइट पर एक बयान में कहा गया है जो कोई भी यूक्रेन, यूरोप और दुनिया को बचाना चाहते हैं वे यूक्रेन आ सकते हैं और रूसी सैनिकों के खिलाफ यूक्रेनियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ सकते हैं। इसी सिलसिले में फ्रांस से भी कुछ वॉलिंटियर्स ने यहां पहुंचना शुरू कर दिया है।