रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी और खुफिया एजेंसी के प्रमुख सर्गेई नारिश्किन ने नाटो देशों के हमला करने पर पोलैंड और बाल्टिक देशों को तबाह कर देने की खुली चेतावनी दे दी है। इसके साथ रूस यूक्रेन को मिसाइल हमलों से लगातार लहूलुहान कर रहा है। यही स्थिति फलस्तीन, हूती संगठन के साथ भी है। ईरान का तनाव चरम पर है और तुर्की मौन है। आखिर अमेरिका की इस कूटनीतिक और सामरिक नीति के पीछे कौन सी चाल छिपी है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह कूटनीति, विदेश नीति अभी तमाम जानकारों को कम समझ में आ रही है। अब डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध उनका (अमेरिका) नहीं है, फिर भी वह उसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने इसके लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और अमेरिका के पूर्व प्रधानमंत्री जो बाइडन की खराब भूमिका को जिम्मेदार ठहराया। इसके साथ-साथ अमेरिका इस्राइल के साथ खुलकर खड़ा है। इस्राइल की सेना गाजा पर लगातार हमला कर रही है। दुनिया के कुछ पर्यवेक्षक यह जानने के लिए हैरान हैं कि आखिर इस्राइल के राष्ट्रपति बेंजामिन नेतेन्याहू चाहते क्या हैं?
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हूतियों पर अमेरिका की कार्रवाई
अमेरिका ने यमन के आतंकी संगठन हूती पर सैन्य कार्रवाई की है और ईरान के साथ लगातार टकराव बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। एक और एयरक्राफ्ट कैरियर भी क्षेत्र में पहुंच चुका है। सुमित मिश्रा अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नजर रखते हैं। उनका कहना है कि अभी दुनिया को राष्ट्रपति ट्रंप का टैरिफ वॉर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। अमेरिका के इस कदम को लेकर यूरोप को नए सिरे से सोचना पड़ रहा है, वहीं चीन के साथ कारोबारी तनाव बढ़ रहा है। कह लीजिए कि अभी दुनिया टैरिफ वॉर और अमेरिका के इस दांव में उलझी है।
अमेरिका, इस्राइल और रूस की मंशा क्या है?
पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि अमेरिका बहुत सोझी समझी चाल से आगे बढ़ रहा है। इसके लिए उसने बड़ा होमवर्क किया है। ऐसा लग रहा है कि रूस की सैन्य कार्रवाई यूक्रेन के दो हिस्से में विभाजित हो जाने के बाद रुकेगी। इसमें से एक हिस्सा रूस के कब्जे में चला जाएगा और दूसरा हिस्सा अमेरिका अपने हित में लेगा। अमेरिका की कोशिश गाजा के पास बेस बनाने की हो सकती है। शशांक कहते हैं कि इसलिए इस्राइल को खुली छूट मिली है। हूती पर अमेरिका हमले कर रहा है और ईरान को घेरने की कोशिश जारी है।
दरअसल अमेरिका परमाणु हथियार कार्यक्रम से मुक्त ईरान चाहता है। शशांक कहते हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति बोल भी रहे हैं और कर भी रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति अपने मिशन में लगे हैं। नेतेन्याहू ने अपने रुख को अक्रामक कर रखा है। इसके साथ यह भी समझने की बात है कि चीन अभी अमेरिका द्वारा थोपे गए टैरिफ वार में व्यस्त है। विदेश मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार कहते हैं कि दुनिया में एक उथल-पुथल है। अब यह धीरे-धीरे निणायक मोड़ की तरफ बढ़ रही है, लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि इसका अंत क्या होगा?
एशिया में चीन बहुत बड़ा खिलाड़ी, ये है ड्रैगन का प्लान
चीन एशिया का सबसे बड़ा खिलाड़ी है। फॉयर पॉवर के मामले में बहुत आगे निकल चुका है। लेकिन इस समय अमेरिका के टैरिफ वॉर का जवाब देने में व्यस्त है।रंजीत कुमार कहते हैं कि जल्द ही भारत में क्वॉड(अमेरिका, आस्ट्रलिया, जापान और भारत) की बैठक होने वाली है। चीन ने इस पर निगाह गड़ा रखी है। उसने अमेरिका रेयर अर्थ और बोइंग विमानों के संदर्भ में आपूर्ति रोककर बड़ा झटका दिया है। यूरोपीय देश फिलहाल अपने भविष्य की तैयारी में व्यस्त हैं। वह बिना अमेरिका के सहयोग वाला अपना भविष्य खड़ा करने में लगे हैं। ऐसे में भारत ने सभी के साथ उपयोगिता और राष्ट्रीय हित को देखकर रिश्ता संतुलित रखा है।
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बदलती दुनिया के परिदृश्य में भारत के लिए सुनहरा अवसर
यूरोप आत्मरक्षा में अपनी सैन्य शक्ति बनाने की पहल कर रहा है। हालांकि यूरोप के पास तकनीक है, लेकिन उसके पास उत्पादन की ओद्योगिक इकाई नहीं है। चीन भविष्य की चुनौती को देखकर भारत और अन्य एशियाई देशों के साथ अपने संबंध मधुर और सहयोगात्मक बनाने में लगा है। रूस के साथ भारत के रिश्ते अच्छे दौर में हैं। ईरान के साथ भारत ने अपने समीकरण को संतुलित कर रखा है। इस्राइल और नई दिल्ली एक अलग समीकरण बना रहे हैं। सबके अंत में आता है अमेरिका। अमेरिका के राष्ट्रपति और उनकी टीम के साथ भारत सहयोगी, कामकाजी, कारोबारी और एक दूसरे के हित को ध्यान में रखकर आगे बढ़ने की पहल कर रहा है। पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं कि भारत के पास सुनहरा अवसर है, लेकिन चुनौती भी है। भारत जरूरत से ज्यादा सतर्क, सावधान रहता है। निर्णय लेने में हिचकता है। घरेलू स्तर पर भी कुछ चिंताएं हैं। इसलिए समय पर त्वरित निर्णय नहीं ले पाता। नई दिल्ली ने इस कमजोरी को दूर कर दिया तो आगे का रास्ता न केवल अच्छा बल्कि भारत को आगे बढ़ाने वाला है।