रूस-यूक्रेन के बीच छिड़ा युद्ध काफी लंबा खिंच चुका है। इस युद्ध की सबसे खास बात यह है कि रूस जैसे महाशक्तिशाली देश के आगे यूक्रेन अब तक टिका हुआ है और उसके हर हमले का जवाब भी दे रहा है। हालांकि, इसका सबसे बड़ा कारण यूक्रेन को नाटो देशों और यूरोपीय संघ से मिलने वाली मदद है। दरअसल, रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देश सैन्य मदद मुहैया करा रहे हैं।
हालांकि, यूक्रेन को यह मदद अब ज्यादा समय तक नहीं मिल पाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन की लगातार मदद करने से नाटो देशों का भी सैन्य भंडार खाली हो रहा है। गोला-बारूद तेजी से खत्म हो रहे हैं, जिससे यूरोपीय देशों का बुरा हाल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को युद्ध सामग्री देने से हथियार डाल दिए हैं। इससे यूक्रेन भी सकते में आ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना युद्धक सामग्री की मदद के यूक्रेन रूस से ज्यादा दिनों तक लड़ाई नहीं लड़ पाएगा।
नाटो देशों को सता रही अपनी चिंता
खाली होते सैन्य भंडार को देखते हुए नाटो देशों को अपनी चिंता भी सताने लगी है। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि नाटों देशों को इस बात की चिंता है कि अगर उनका युद्ध किसी अन्य देश से हुआ तो वह मुकाबला कैसे करेंगे। दरअसल, बिना गोला-बारूद के उनका किसी भी लड़ाई को लड़ना संभव नहीं है। यूरोपीय संघ के विदेश नीति के प्रमुख जोसेफ बोरेल ने पहले ही इसके संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि मैं यह तो नहीं कहूंगा के सभी यूरोपीय देशों के पास गोला-बारूद पूरी तरह से खत्म हो गया है, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि इन देशों के युद्धक सामग्री के भंडार काफी कम हो गए हैं।
ऊर्जा भंडार भी हो रहा कम
यूरोपीय देश ऊर्जा क्षेत्र में पूरी तरह रूस पर निर्भर हैं, लेकिन पिछले दिनों उनके द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों की प्रतिक्रिया स्वरूप रूस ने भी इन देशों को तेल व गैस की आपूर्ति करने से मना कर दिया है। इससे यूरोप में ऊर्जा संकट छा गया है। ऐसे में एक तरफ ऊर्जा संकट और दूसरी तरफ खाली होते सैन्य भंडार के चलते ये देश ज्यादा दिनों तक यूक्रेन की मदद नहीं कर पाएंगे।