क्या रूस और यूक्रेन के बीच जंग से तीसरे विश्व युद्ध का खतरा भी खड़ा हो सकता है? यह आशंका ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन के उस बयान से जाहिर होती है जिसमें उन्होंने कहा कि रूस दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी जंग की तैयारी कर रहा है।
गुरुवार सुबह जब दुनिया जब तक नींद से जागी तब तक रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई करने का एलान करते हुए उस पर धावा बोल दिया। रूसी सैनिक अब यूक्रेन की राजधानी कीव में घुस चुके हैं। कीव समेत कई शहरों में बमबारी की खबर है। बैलेस्टिक मिसाइलों से रूस यूक्रेन पर हमला कर रहा है। इस हमले में अब तक 50 लोगों की मौत हो गई है। इनमें 10 आम नागरिकों के मारे जाने की बात सामने आई है। यूक्रेन ने भी रूस के 50 सैनिक मारने की बात कही है। इस युद्ध में हजारों लोगों के मारे जाने का खतरा मंडराने लगा है। पूरी दुनिया की नजर इस इस घटनाक्रम पर लगी हुई है।
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विश्व में एक और महायुद्ध के हालात को देखते हुए दूसरे विश्व युद्ध की भी यादें ताजा हो गई हैं। द्वितीय विश्व युद्ध वर्ष 1939-45 के बीच होने वाला एक सशस्त्र विश्वव्यापी संघर्ष था। यह इतिहास का सबसे बड़ा संघर्ष था जो लगभग छह साल तक चला था। अनुमान है कि एक सितंबर 1939 से दो सितंबर 1945 तक चले इस युद्ध में न केवल 7 से 8.5 करोड़ लोग मारे गए बल्कि भूखमरी, तंगहाली और महंगाई भी बढ़ी।
आइए जानते हैं कि दूसरा विश्व युद्ध किन वजहों से हुआ था?
इस युद्ध के कई प्रमुख कारण थे। जिसकी नींव प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ही पड़ गई थी। वर्साय संधि की कठोर शर्तें, आर्थिक मंदी, तुष्टीकरण की नीति, जर्मनी और जापान में सैन्यवाद का उदय, राष्ट्र संघ की विफलता आदि इसके कारण प्रमुख कारणों में गिना जाता है।
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प्रथम विश्व युद्ध की एक तस्वीर
- फोटो : Social Media
द्वितीय विश्व युद्ध की कहानी प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति से शुरू होती है। प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार हुई। इसके बाद विजयी मित्र राष्ट्रों जिसमें ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, अमेरिका और जापान आदि देश शामिल थे, उन्होंने जर्मनी को वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया। इस संधि के तहत जर्मनी को युद्ध का दोषी मानकर उस पर आर्थिक दंड लगाया गया। इस कारण उसे अपनी भूमि के एक बड़े हिस्से से हाथ धोना पड़ा। साथ ही उस पर दूसरे राज्यों पर कब्जा करने की पाबंदी लगा दी गई और उसकी सेना का आकार भी सीमित कर दिया गया।
जर्मनी को यह संधि अपमानजनक लगी और इसी वजह से वहां अति-राष्ट्रवाद के प्रसार का रास्ता खुला। इधर इटली में 1922 में बेनिटो मुसोलिनी और जर्मनी में 1933 में एडोल्फ हिटलर के रूप में फासीवादी तानाशाही सरकारें बन गई।
हिटलर ने वर्साय संधि का उल्लंघन शुरू कर दिया
हिटलर ने खुले तौर पर वर्साय की संधि का उल्लंघन किया और जर्मनी की सेना तथा हथियारों का गुप्त रूप से निर्माण शुरू कर दिया। जर्मनी ने वादा किया था कि वह चेकोस्लोवाकिया या किसी अन्य देश पर आक्रमण नहीं करेगा, लेकिन यह वादा तोड़ते हुए जर्मनी ने हिटलर की अगुआई में मार्च 1939 में चेकोस्लोवाकिया पर हमला करके उस पर कब्जा जमा लिया।
जर्मन सेनाओं ने इसके बाद एक सितंबर 1939 को पोलैंड पर धावा बोला। पोलैंड पर यह हमला देख ब्रिटेन और फ्रांस बौखलाए और वे उसकी मदद के लिए आगे बढ़े। उन्होंने जर्मनी के पोलैंड पर आक्रमण करने के दो दिन बाद जर्मनी के खिलाफ हमला बोल दिया। इस हमले से ही दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हुई। युद्ध की इस अवधि को वाक् युद्ध के रूप में जाना जाता है।
द्वितीय विश्वयुद्ध (फाइल फोटो)
- फोटो : Social Media
दुनिया के दो गुटों में लड़ा गया युद्ध
यह युद्ध भी पहले विश्वयुद्ध की तरह दो गुटों के बीच लड़ा गया था। एक ओर थे धुरी राष्ट्र-जिसमें जर्मनी, इटली, जापान, ऑस्ट्रिया शामिल थे। तो वहीं दूसरी ओर थे मित्र राष्ट्र जिनमें ब्रिटेन, फ्रांस, सोवियत संघ, अमेरिका शामिल रहा।
शुरू में जर्मनी को सफलता मिली और उसने फ्रांस को जीत लिया। फ्रांस पर जीत के बाद हिटलर ने ब्रिटेन पर आक्रमण के मंसूबे पाल लिए। जर्मनी ने ब्रिटेन पर 1940 के जुलाई से सितंबर तक ताबड़तोड़ हमले किए। यह पूरी तरह से हवा में लड़ी जाने वाली पहली लड़ाई थी। हालांकि कुछ समय बाद जर्मनी ने ब्रिटेन पर आक्रमण का अपना इरादा रद्द कर दिया।
बाद में जर्मन सेनाओं को सोवियत संघ की सेनाओं ने धूल चटा दी। 1941 में जापान के अमेरिका के पर्ल हार्बर नेवी बेस पर हवाई हमले से अमेरिका भी इस युद्ध शामिल हो चुका था। इस हमले के कुछ दिनों बाद जर्मनी ने अमेरिका के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। अब तक मित्र राष्ट्रों को यह खबर लग चुकी थी कि नाजियों ने यहूदी लोगों की सामूहिक हत्या कर रहा है। अमेरिका ने इन हत्याओं का बदला लेने का वादा किया।
युद्ध कैसे खत्म हुआ?
अब तक ब्रिटेन भी जर्मनी को सबक सिखाने के इंतजार में था। उसकी सेनाओं ने उत्तरी अफ्रीका और स्टालिनग्राद पर जवाबी कार्रवाई की। जर्मनी ने फरवरी 1943 में स्टालिनग्राद में सोवियत संघ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। जर्मन सेना की यह पहली बड़ी हार थी। दूसरी तरफ उत्तरी अफ्रीका में जर्मन और इतालवी सेना मित्र राष्ट्रों के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर हुई।
हिटलर ने आत्महत्या कर ली
जर्मनी की इस पराजय को हिटलर बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसने 30 अप्रैल 1945 को आत्महत्या कर ली। जिसके बाद जर्मनी ने आत्मसमर्पण कर दिया।
दूसरी तरफ अमेरिका ने 6 अगस्त और 9 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिरा दिए। जिसमें लाखों लोग मारे गए। इससे 2 सितंबर 1945 को जापान ने सरेंडर कर दिया। इस तरह जापान पर परमाणु बम गिराने के साथ दूसरा विश्व युद्ध अपने अंजाम पर पहुंच गया।