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Russia Shiveluch Volcano Erupts: रूस का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी फटा, 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक दिखा राख का ढेर

Tue, 11 Apr 2023 09:24 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रूस

सार

कामचाटका ज्वालामुखी विस्फोट प्रतिक्रिया टीम (केवीईआरटी) ने बताया कि ज्वालामुखी के फटने के बाद उड्डयन विभाग को चेतावनी जारी कर दी गई है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि ज्वालामुखी में 15 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्फोट कभी भी हो सकता है। 
 
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Volcano, ज्वालामुखी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे जंग के बीच अब एक और खतरा मंडरा रहा है। रूस के कामचाटका प्रायद्वीप में शिवलुच ज्वालामुखी के फटने से राख का ढेर लगभग 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक नजर आया। इसे हवाई यातायात के लिए खतरा बताया जा रहा है। 

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15 किमी ऊंचाई तक हो सकता है विस्फोट
कामचाटका ज्वालामुखी विस्फोट प्रतिक्रिया टीम (केवीईआरटी) ने बताया कि ज्वालामुखी के फटने के बाद उड्डयन विभाग को चेतावनी जारी कर दी गई है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि ज्वालामुखी में 15 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्फोट कभी भी हो सकता है। इससे कम उड़ान वाले विमान और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। 

लोग यात्रा न करें 
एक समाचार एजेंसी के अनुसार, उस्ट-कामचत्स्की नगरपालिका क्षेत्र के अधिकारी ने स्कूलों को बंद करवा दिया था। साथ ही लोगों को अपने घरों में रहने के आदेश दिए। अधिकारी ने कहा कि विस्फोट के बाद धूआं 70 किलोमीटर दूर क्लाईची और कोजीरेवस्क के क्षेत्रों तक फैल गया है। इसलिए लोगों को अनावश्यक यात्रा करने से बचने को कहा गया है।
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साल 2007 में सबसे खतरनाक विस्फोट
धरती पर कई ज्वालामुखी मौजद हैं, जिनकी गिनती भी नहीं की जा सकती है। इनमें से शिवलुच ज्वालामुखी 10,771 फीट ऊंचा है। यह कामचाटका प्रायद्वीप का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी है। पिछले 10 हजार साल में 60 बार भयानक विस्फोट कर चुका है। बताया जाता है कि आजतक का सबसे बड़ा विस्फोट साल 2007 में हुआ था। 

टीम ने पहले दी थी चेतावनी
कामचाटका वॉल्कैनिक इरप्टशन रेस्पॉन्स टीम ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि यह बहुत ज्यादा सक्रिय हो गया है कभी भी विस्फोट हो सकता है। टीम ने कहा था कि शिवलुच ज्वालामुखी के अंदर लावा का गुंबद तेजी से बढ़ रहा है। इसके क्रेटर से लगातार बहुत ज्यादा भाप और गैस निकल रही। हल्के-फुल्के विस्फोट भी हो रहे। आखिरकार शिवलुच ज्वालामुखी फट गया और राख का ढेर लगभग 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक देखा गया। 

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