रूस के कर्ज डिफॉल्ट करने की आशंका लगातार गहरा रही है। उसका खराब असर कर्जदाता संस्थानों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से रूस की अपनी विदेशी मुद्रा तक पहुंच कठिन हो गई है। इसे देखते हुए रूस सरकार के पास बहुत कम विकल्प बचते हैं।
रूस के वित्त मंत्री एंतॉन सिलुआनोव ने सरकारी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा- ‘हमारे पास कुल 640 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा है। उसमें से 300 बिलियन डॉलर उस अवस्था में हैं, जिनका अभी हम इस्तेमाल नहीं कर सकते।’ विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल रूस के पास नकदी रूप में उतने डॉलर मौजूद हैं, जिनसे वह विदेशी कर्ज चुका सकता है। फिर तेल और गैस का निर्यात जारी रहने के कारण उसके पास डॉलर आने के सारे स्रोत अभी बंद नहीं हुए हैं। इसके बावजूद सिलुआनोव ने चेतावनी दी है कि ‘अमित्र’ देशों के बॉन्ड धारकों को रूसी सेंट्रल बैंक तब तक रुबल में भुगतान करेगा, जब तक रूस के धन को वे देश देने को तैयार नहीं हो जाते हैँ।
जापान की एजेंसी मिजुहो रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज का अनुमान है कि रूस की विदेशी मुद्रा का 48.6 फीसदी हिस्सा सात धनी देशों में जमा है, जिसे उन्होंने जब्त कर लिया है। इन देशों में अमेरिका, जापान और फ्रांस शामिल हैं। इस एजेंसी से जुड़े अर्थशास्त्री युई तमुरा ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘अगर रूस सरकार और वहां की कंपनियां विदेशी मुद्रा की कमी के कारण कर्ज नहीं चुकाती हैं, तो उससे रुबल में भरोसा और घटेगा। इसका परिणाम मुद्रास्फीति बढ़ने के रूप में सामने आएगा।’
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले हफ्ते एक आदेश पर दस्तखत किया था। उसके जरिए ‘शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में शामिल देशों’ के कर्जदाताओं को रुबल में भुगतान करने का अधिकार सरकारी संस्थानों और कंपनियों को दिया गया था।