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उत्तरी ध्रुव को नया व्यापार मार्ग बनाने को बेताब चीन और रूस

Thu, 21 Nov 2019 05:37 PM IST
Trainee Trainee वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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Ice Mountain
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पूरी दुनिया के लिए उत्तरी ध्रुव क्षेत्र में बर्फ का पिघलना और जलवायु परिवर्तन के तमाम असर सबसे बड़े खतरे हैं। लेकिन चीन और रूस को आर्कटिक क्षेत्र में अभूतपूर्व तरीके से पिघल रही बर्फ एक शानदार अवसर की तरह दिख रही है। दोनों देश उत्तरी ध्रुव के इस सर्द पानी को व्यापर मार्ग के रूप में विकसित करने की तैयारी में हैं। इस बाबत एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा भी दोनों ने साझा तौर पर कर दी है।

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चीन-रूस की यह साझा पहल वैश्विक रूप से बेहद अहम साबित हो सकती है। एक बात तो तय है कि इस योजना के सफल हो जाने का सीधा मतलब होगा दोनों देशों की दुनिया की दूसरी बड़ी ताकतों पर निर्भरता से काफई हद तक मुक्ति। दोनों ही देशों को  राजनैतिक और आर्थिक रूप से एक नई किस्म की आत्मनिर्भरता की संभावना इसमें दिख रही है।

यह उत्तरी समुद्र मार्ग चीन की बेल्ट एंड रोड पहल के विस्तार की कोशिशों के आकर्षक विकल्प के रूप में उभर सकता है।

यह समुद्री मार्ग पूरे आर्कटिक क्षेत्र को कई दिशाओं से घेरता है और एक बार चीन-रूस अगर इसे विकसित कर ले गए तो न केवल इस विशाल और अनछुए क्षेत्र की अपार प्राकृतिक संपदा को दोहन हो सकेगा, इसके साथ ही एकदम नए किस्म की आर्थिक संभावनाएं उभरेंगी। दोनों के लिए मौजूदा अवसरों का बेहतर लाभ लेना आसान होगा।
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चीन की ललक अधिक है

यह समुद्री मार्ग रूस के लिए उतना नया भी नहीं है जितना कि यह चीन के लिए साबित हो सकता है। रूस की अनेक तेल व गैस की कंपनियां, शिपिंग कंपनियां इस इलाके के कुछ हिस्सों का दोहन कर ही रही हैं। चीन के लिए यह एकदम नया अवसर होगा क्योंकि उसे इस क्षेत्र में एक नए सहयोगी की जबर्दस्त दरकार है। चीन-रूस रिश्तों में मजबूती के लिए भी यह अहम साबित हो सकता  है।

मलक्का जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ मलक्का) या सुएज कैनाल के अलावा चीन को इस जलमार्ग से काफी अहम वैकल्पिक व्यापार मार्ग मिल जाएगा। भौगोलिक रूप से बहुत दूर स्थित व्यापारिक साझीदारों से सीधे संपर्क का रास्ता खुल जाएगा।
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