सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने संघीय बजट और विकास निधि के आवंटन पर अपने प्रमुख सहयोगी बिलावल भुट्टो जरदारी के नेतृत्व वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की सभी मांगों को स्वीकार कर लिया है। एक मीडिया रिपोर्ट में रविवार को यह जानकारी दी।
इस हफ्ते की शुरुआत में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी को आश्वासन दिया था कि बजट को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ने के बाद सरकार एक सरकार एक समिति बनाकर कई मुद्दों पर सहयोगी की आपत्तियों को दूर करने के लिए कदम उठाएगी। जिओ न्यूज की खबर के मुताबिक, दोनों दलों की वार्ता समितियों के बीच तीसरे दौर की वार्ता में दोनों सहयोगी दलों के बीच यह सहमति बनी है। पीपीपी ने संघीय बजट के संबंध में इसे भरोसे में न लेने पर चिंता जताई थी।
जिओ न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार पंजाब में विकास निधि और प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों के लिए पीपीपी को प्राथमिकता देगी। सूत्रों के मुताबिक, पीएमएल-एन ने जिला प्रशासन, विधि अधिकारियों की नियुक्ति, विभिन्न बोर्डों और प्राधिकरणों में प्रतिनिधित्व, स्थानीय निकाय चुनाव जल्द कराने और पीएमएल-एन सांसदों के बराबर विकास निधि के वितरण के बारे में पीपीपी की मांगों को स्वीकार कर लिया है।
सूत्रों ने बताया कि पीपीपी ने मुख्यमंत्री सचिवालय में एक अतिरिक्त सचिव की नियुक्ति की मांग की है, जिसका काम पार्टी के सामने आने वाले मुद्दों का समाधान करना होगा। सूत्रों ने बताया कि पंजाब सरकार पीपीपी के साथ विचार-विमर्श कर उन क्षेत्रों में जिला उपायुक्तों, जिला पुलिस अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति करेगी, जहां सियासी दल को महत्वपूर्ण समर्थन हासिल है।
वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने 12 जून को संघीय बजट पेश किया था। लेकिन सरकार की प्रमुख सहयोगी पीपीपी खुश नहीं थी, क्योंकि बजट तैयार करते समय उससे परामर्श नहीं किया गया था। पीएमएल-ए सरकार के पास बहुमत नहीं है। इसलिए उसे इस बात की चिंता है है कि अगर पीपीपी का समर्थन नहीं मिलता है तो सरकार संसद में बजट पारित नहीं करा पाएगी।