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'मुसलमानों को मुस्लिम ब्रदरहुड पड़ रहा भारी': अमेरिकी स्वास्थ्य सचिव के बयान की आलोचना, क्या बोले विशेषज्ञ?

Wed, 28 Oct 2026 02:59 PM IST
अमन मौर्या एएनआई, मिशिगन, अमेरिका

सार

अमेरिकी स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर ने दावा किया है कि मुस्लिम ब्रदरहुड के कारण अरब मुसलमानों में विज्ञान और साहित्य का योगदान घटा है। उनके इस बयान की विशेषज्ञों और नेताओं द्वारा कड़ी आलोचना की जा रही है।
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रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर की ओर से अरब देशों के मुसलमानों पर किए गए दावे पर जमकर आलोचना हो रही है। उन्होंने कहा था कि आज के अरब देशों के मुसलमान अतीत की तरह विज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में काम नहीं कर रहे हैं, न ही प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत रहे हैं। कैनेडी ने सोमवार को मिशिगन में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए प्रचार करते हुए ये बातें कहीं। इनमें पूर्व कांग्रेस सदस्य माइक रोजर्स भी शामिल थे, जो सीनेट की एक खाली सीट के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कला, साहित्य, विज्ञान और इंजीनियरिंग में इस्लाम के योगदान में आई गिरावट के लिए 'मुस्लिम ब्रदरहुड' को जिम्मेदार ठहराया। यह एक इस्लामी आंदोलन है, जिसकी शुरुआत 1928 में मिस्र में हुई थी।
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'द वाशिंगटन पोस्ट' के अनुसार, इस कार्यक्रम में कैनेडी ने कहा, '1928 में 'मुस्लिम ब्रदरहुड' की विचारधारा हावी हो गई; यही वजह है कि आज कोई भी मुसलमान या अरब देशों में मुसलमान नोबेल पुरस्कार जीतता हुआ नहीं दिखता।' उन्होंने आगे कहा, 'दुनिया में 50 करोड़ (500 मिलियन) अरब देशों के लोग हैं, फिर भी वे विज्ञान के क्षेत्र में कुछ खास नहीं कर रहे हैं। वे न तो नोबेल पुरस्कार जीतते हैं, न ही फील्ड्स मेडल या वुल्फ प्राइज जीतते हैं और न ही उस तरह का साहित्य रच रहे हैं जैसा वे पहले रचा करते थे।'
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इस्लाम के स्वर्णिम इतिहास पर क्या बोले कैनेडी?
कैनेडी ने यह भी कहा कि 'मुस्लिम ब्रदरहुड' ने एक ऐसी नई विचारधारा पेश की, जो पारंपरिक इस्लाम से बहुत ही खतरनाक तरीके से अलग थी। उन्होंने तर्क दिया कि इसने ऐसे ठहरे हुए समाज को जन्म दिया है, जिसने अपने ही लोगों को निराश किया है। उन्होंने बताया कि इस्लाम के इतिहास में एक 'स्वर्ण युग' आया था, जो लगभग एक हजार साल तक चला। उस दौरान इस्लामी क्षेत्र कला, साहित्य, विज्ञान और इंजीनियरिंग की नींव के केंद्र हुआ करते थे। कैनेडी ने आगे कहा कि मुस्लिम ब्रदरहुड ने उस पूरी परंपरा को नष्ट कर दिया है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मुस्लिम ब्रदरहुड के बारे में बात करना इस्लामोफोबिया (इस्लाम के प्रति पूर्वाग्रह) नहीं है।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?
उनके इन बयानों के बाद ऑनलाइन आलोचना शुरू हो गई। उनके विरोधियों ने अरब विद्वानों और वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को सामने रखकर उन्हें जवाब दिया। 'यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (सीडीसी) के पूर्व प्रिंसिपल डिप्टी डायरेक्टर नीरव शाह ने एक्स हैंडल पर कई पोस्ट लिखकर कैनेडी की आलोचना की। उन्होंने कैनेडी को गैर-गंभीर और दुनिया के प्रति उदासीन बताया और उनके दावों को गलत साबित करने के लिए नोबेल पुरस्कार विजेताओं और विद्वानों की सूची पेश की। केनेडी की टिप्पणियों के जवाब में दिए गए उदाहरणों में मिस्र-अमेरिकी रसायनज्ञ अहमद जेवेल शामिल थे, जिन्हें 1999 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार मिला था और यमनी पत्रकार तवक्कोल करमान (जिन्हें 2011 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था) ने भी आलोचना की।
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एक अन्य पोस्ट में, शाह ने केनेडी के समर्थकों के उन तर्कों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि सूची में शामिल कुछ लोगों ने अपना काम अमेरिका में किया था। शाह ने कहा, 'लेकिन उन्होंने असल में ऐसा कुछ नहीं कहा था। इसलिए, ये बचाव केवल बाद में गढ़े गए तर्क हैं।' उन्होंने आगे कहा कि व्यापक रूप से देखा जाए तो यह गैर-पश्चिमी लोगों के काम को कमतर आंकने और उसका महत्व घटाने की एक लंबी कोशिश का ही एक और हिस्सा है।
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