ब्रिटेन की राजधानी लंदन में शनिवार को प्रवासियों को लेकर दो विरोधी गुटों के बीच टकराव हुआ। ये प्रदर्शन एक होटल के बाहर हुए, जहां शरणार्थियों को ठहराया गया है। एक तरफ कई सौ लोग यूनियन जैक (ब्रिटेन का झंडा) लहराते हुए थिसल सिटी बार्बिकन होटल के बाहर इकट्ठा हुए। उन्होंने होटल में रह रहे प्रवासियों के खिलाफ नारे लगाए जैसे- 'ब्रिटेन भर गया है' और 'गंदे लोग'। उनका कहना था कि यह होटल प्रवासियों के लिए बंद कर दिया जाना चाहिए। दूसरी ओर, एक बड़ी संख्या में लोग 'शरणार्थियों का स्वागत है' जैसे नारे लगाते हुए इनका विरोध कर रहे थे। पुलिस ने दोनों गुटों को अलग-अलग रखने के लिए मोर्चा संभाला। होटल के अंदर मौजूद लोग इन विरोध प्रदर्शनों को खिड़कियों से देख रहे थे।
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हाल के दिनों में और भी प्रदर्शन
ऐसे ही प्रदर्शन हाल ही में लंदन के बाहरी इलाके एपिंग में भी हुए, जहां एक प्रवासी पर यौन शोषण का आरोप लगा था। इसके अलावा इंग्लैंड के कई अन्य शहरों में भी प्रवासी-विरोधी प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि वे प्रवासियों से सुरक्षा को खतरा महसूस कर रहे हैं, खासकर वे प्रवासी जो हाल ही में छोटी नावों से इंग्लिश चैनल पार कर ब्रिटेन पहुंचे हैं। इनमें से ज्यादातर युवा पुरुष हैं। इन प्रदर्शनों में कुछ स्थानीय लोग शामिल हुए, लेकिन कई प्रदर्शन दक्षिणपंथी (फार-राइट) गुटों की तरफ से आयोजित या समर्थित भी थे।
पिछली साल की हिंसा का डर
एक साल पहले, गर्मियों के मौसम में कई दिनों तक इंग्लैंड और नॉर्दर्न आयरलैंड में प्रवासी विरोधी दंगे हुए थे। तब भीड़ ने प्रवासियों को ठहराने वाले होटलों, मस्जिदों, पुलिस स्टेशनों और एक पुस्तकालय पर हमला किया था। कुछ हमलावरों ने गैर-श्वेत लोगों को भी निशाना बनाया था, और पुलिस पर ईंटें और आतिशबाजियां फेंकी थीं। इस हिंसा की शुरुआत साउथपोर्ट शहर में एक डांस क्लास के दौरान हुई थी, जहां तीन लड़कियों की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। सोशल मीडिया पर अफवाह फैली कि हमलावर कोई नया प्रवासी है, जबकि असल में हत्यारा ऐक्सेल रूडकुबाना एक ब्रिटिश जन्मा 17 साल का युवक था।
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वहीं इसे लेकर तमाम विशेषज्ञ और सामाजिक संगठन कह रहे हैं कि गुस्सा, डर, झूठी खबरें और राजनीतिक उकसावे जैसी चीजें फिर से ऐसी हिंसा को जन्म दे सकती हैं। हालांकि इस बार के प्रदर्शन अभी तक छोटे और शांतिपूर्ण रहे हैं।