आमतौर पर 50 साल की उम्र पर पहुंचते-पहुंचते नजर कमजोर होने लगती है लेकिन यह सामान्य हानि नहीं है। देखने और सुनने की क्षमता में कमी होने से डिमेंशिया का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेष तौर पर 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखने की क्षमता कमजोर होने पर डिमेंशिया (मनोभ्रंश) विकसित होने का जोखिम 50 फीसदी तक बढ़ जाता है।
यदि नजर कमजोर होने की समस्या को ठीक कर लिया जाए तो यह जोखिम बहुत कम हो जाता है। डिमेंशिया की रोकथाम पर केंद्रित एक अंतरराष्ट्रीय आयोग की ओर से पिछले सप्ताह प्रकाशित रिपोर्ट में यह बातें कही गई हैं। रिपोर्ट में डिमेंशिया के लिए कुल 14 वजहें दी गई हैं, जिनमें दृष्टि दोष को भी शामिल किया गया है। खतरे वाले अन्य कारकों में धूम्रपान, डायबिटीज (मधुमेह), सामाजिक रूप से अलग-थलग होना और उच्च रक्तचाप शामिल हैं। सुनने की क्षमता में कमी भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाता है।
इस तरह शुरू होती है दिक्कत
संवेदी क्षति वाले लोगों यानी जिनमें देखने और सुनने की क्षमता कम होती है उनके मस्तिष्क की ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है। इस प्रकार मस्तिष्क को दृष्टि और श्रवण के माध्यम से जितनी जानकारी मिलनी चाहिए, उतनी नहीं मिल पाती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में मनोचिकित्सा की प्रोफेसर डॉ. गिल लिविंगस्टन ने कहा कि मस्तिष्क के ऊतक उपयोग नहीं होने पर खत्म हो जाते हैं। इसलिए, इनमें कम उत्तेजना होती है तो इनका अधिक क्षय होगा।
मस्तिष्क में सभी का एक-दूसरे से संबंध
दरअसल, हमारे मस्तिष्क में अलग-अलग खाने बने हैं। जब हम कोई बात सुनते हैं तो मस्तिष्क का एक क्षेत्र उसे संसाधित कर हमें उस जानकारी को समझने में मदद करता है। यह क्षेत्र मस्तिष्क के उस हिस्से के सबसे करीब है जो अल्जाइमर रोग से सबसे अधिक प्रभावित होता है। इससे पता चलता है कि इनमें संबंध हो सकता है। इसी तरह, किसी चीज को जब हम देखते हैं तो हमारी दृष्टि उसे तेजी के साथ मस्तिष्क के दूसरे भाग में भेजती है, लेकिन हम उस जानकारी का उपयोग किस प्रकार करते हैं, इससे कई अलग-अलग क्षेत्र सक्रिय हो जाते हैं।
अकेलापन खतरनाक : जिन लोगों की देखने सुनने की क्षमता कम होती है वे प्राय: अलग-थलग पड़ जाते हैं और सामाजिक रूप से कम सक्रिय होते हैं। इस बात के प्रमाण मौजूद हैं कि अकेलापन व्यक्ति के मस्तिष्क को स्थूल रूप से बदल सकता है और यह डिमेंशिया के जोखिम का एक जाना हुआ कारक है। मॉन्ट्रियल में कॉनकॉर्डिया विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की प्रोफेसर नेटली फिलिप्स कहती हैं, दृष्ट हानि आपको पार्टी में जाने से रोकती है। वहीं, सुनने की क्षमता खोने का मतलब है कि आप पार्टी में जाते हैं और किसी से बात नहीं करते।
बचाव के लिए क्या करें : डॉ. ली की सलाह है कि अपनी नजर की क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए आप अपनी आंखों की किसी अच्छे डॉक्टर से जांच कराएं। वह साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच की सलाह देते हैं। डॉ. ली की सलाह है कि सुनने की क्षमता की जांच अगर आप चाहें तो घर पर भी करवा सकते हैं। मिमी जैसे निःशुल्क श्रवण परीक्षण ऐप, सटीक परिणाम प्रदान करते हैं। डॉ. फिलिप्स कहते हैं, इन विकारों के दूर होने से न सिर्फ डिमेंशिया का खतरा कम होगा, बल्कि आपके दैनिक जीवन में भी सुधार आएगा।