उत्तर कोरिया की सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के 70वें स्थापना दिवस के मौके पर शनिवार को राजधानी प्योंगयांग में एक भव्य परेड हुई। इस परेड में बड़ी तादाद में बख़्तरबंद गाड़ियां और मिसाइलें शामिल की गईं। रात में हुई ज़ोरदार बारिश की वजह से परेड देर से शुरू हुई, पर परेड के जोश या इसकी तैयारी पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा। पार्टी के सबसे बड़े नेता किम जोंग उन परेड में मौजूद थे।
पर किसी दूसरे देश का प्रमुख इस मौके पर मौजूद नहीं था। हर पत्रकार पर निगरानी रखने के लिए अधिकारी तैनात किए गए थे। पत्रकारों को किसी भी आम आदमी से मिलने की इजाज़त नहीं दी गई और कैमरामैन को रिकॉर्डिंग करने से मना कर दिया गया। क्या पिछले दशकों में उत्तर कोरिया में बदलाव आया है ?
साल के ज़्यादातर समय प्योगंयांग शहर में अंधेरा छाया रहता है। आप जैसे ही प्योंगयांग शहर में दाख़िल होते हैं, आपका सबसे पहले साबका पड़ता है अंधेरे से। उत्तरी कोरिया की सैटेलाइट से खींची गई एक बहुचर्चित तस्वीर है, जिसमें डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया अंधेरे में डूबा एक पिंड सा दिखता है।
दूसरी ओर अंतरिक्ष से दक्षिण कोरिया रोशनी में नहाया हुआ दिखता है। लेकिन यह अंधेरा यहां की सड़कों पर हक़ीक़त बन जाता है। जैसे ही अंधेरा होता है, आप एक अपार्टमेंट ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक होकर गुजरें तो शायद ही किसी खिड़की में रोशनी दिखेगी। बिजली की कमी वाले इस देश का यही हाल है।
कुछ लोगों के लिए पैसा
दिन के समय मकानों की बालकनी में छोटे छोटे सोलर पैनल दिखते हैं। यह इस बात का संकेत है कि आम लोग कैसे सरकारी संसाधनों को अपने लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
निजी संपत्ति इकट्ठा करने की कारगुजारी यहां कई तरीक़ों से दिखती हैं। नब्बे के दशक में अकाल आने के बाद अर्थव्यवस्था में बदलाव शुरू हो गए थे। भूखे लोगों ने खुद अनाज पैदा करने और उसे प्राइवेट बाज़ारों में बेचने का रास्ता निकाला और इस तरह मौत और ज़िंदगी की समस्या को हल करने में कुछ हद तक मदद मिली।
सैटेलाइट से ली गई उत्तर और दक्षिण कोरिया की तस्वीर। पहली तस्वीर 1986 में जबकि दूसरी तस्वीर 1996 में ली गई थी। लेकिन ये गतिविधियां एक बार सार्वजनिक जीवन का हिस्सा बनीं तो फिर गईं नहीं। प्रशासन की ओर से इस तरफ़ केवल कुछ मामूली प्रयास किए गए। लेकिन इस सबसे ऊपर, कुछ प्रतिष्ठान तो पूंजीवादी संस्थाओं की तरह व्यवहार करते हैं।
वे ऐसे मैनेजर बनाने की पेशकश करते हैं, जिनमें मुनाफ़ा बनाए रखने की क्षमता हो। ये निजी कटौती करते हैं और सरकार सार्वजनिक कटौती करती है। उत्तरी कोरिया में छोटे स्तर की पूंजीवादी गतिविधियां घटित हो रही हैं। इसका मतलब है कि यहां पैसा है, लेकिन कुछ पैसा कुछ ही लोगों के लिए है।
बाहरी विचारों से दूरी
अंदर ही अंदर व्यवसाय करने के तरीक़े भी बदल रहे हैं। चीन के साथ उत्तरी कोरिया की सीमा कमोबेश खुली है और हर क़िस्म के सामान की यहां आमद हो रही है। प्योंगयांग में डिपार्टमेंटल स्टोरों में उन लोगों के लिए हर वो उत्पाद मौजूद है, जो इसे ख़रीद सकते हैं। उत्तरी कोरिया, दक्षिण कोरिया समेत कई दूसरे देशों के मुक़ाबले बहुत ग़रीब है।
यहां तक कि प्योंगयांग में ऐसे भी धनी नहीं हैं जिनकी तुलना सियोल के लोगों से की जा सके। लेकिन अंतरिक्ष से उत्तरी कोरिया के दृश्य को एक किनारे कर दें तो यहां की एक और क्लासिक तस्वीर हैः यानी लंबी लंबी लेकिन खाली सड़कें जिनपर कुछेक बैलगाड़ियों को छोड़कर कोई ट्रैफ़िक नहीं होता। आज प्योंगयांग में ट्रैफ़िक जाम है। यह जाम चीनी गाड़ियों की वजह से है, पर इसमें बीएमडब्लू से लेकर फ़ोक्सवैगन तक की गाड़ियां हैं।
उत्तरी कोरिया के बारे में किसी भी किताब को प्योंगयांग एयरपोर्ट पर ही ज़ब्त कर लिया जाता है। लेकिन यह एयरपोर्ट सरकार की विडंबना ही दिखाता है। डॉलर और यूरो लाने वाले लाखों लोगों के लिए यह बनाया गया है, लेकिन बाहरी लोगों को यहां हमेशा संदेह भरी नज़रों से देखा जाता है। असल में सरकार उन्हें और उनके पैसे को आने देना चाहती है, उनके विचारों को नहीं।
लेकिन उत्तरी कोरिया में बाहरी लोग कैसे आ सकते हैं जबकि वो सामग्री उनसे छीन ली जाती है, जिसके बारे में सरकार सोचती है कि इससे उसके नागरिक भ्रष्ट हो जाएंगे।