ब्राजील की राष्ट्रपति जिल्मा रूसेफ के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया पर संशय खड़ा हो गया है। ब्राजील के निचले सदन के कार्यकारी अध्यक्ष वाल्दिर मारान्याओ ने 17 अप्रैल को महाभियोग का रास्ता साफ करने वाली वोटिंग को रद्द कर दिया है।
इस वोटिंग के बाद सिनेट में महाभियोग चलाने के लिए बुधवार को वोटिंग होनी थी। मारान्याओ ने कहा कि निचले सदन में कुछ गड़बड़ियां हई थीं। उन्होंने कहा कि सदस्यों का वोटिंग से पहले ही ये बता देना कि वो किस पक्ष में वोट करेंगे ये गलत है और पार्टी नेताओं का सदस्यों को वोटिंग के बारे में निर्देश देना भी गलत है।
मारान्याओ ने निचले सदन में दोबारा वोटिंग कराने की बात कही है लेकिन ये देखने वाली बात है कि सिनेट क्या अब प्रक्रिया को निचले सदन में वापस भेजने पर राजी होगा।
ये मुश्किल ही है कि महाभियोग के पक्ष में वोट डालने वाले 367 सदस्य अपना रुख बदलने को राजी होंगे। लेकिन कार्यकारी स्पीकर के फैसले से ब्राजील के राजनीतिक माहौल में नया मोड़ आ गया है।
हालांकि जिल्मा रूसेफ के लिए मुश्किलें अब भी आसान नहीं होंगी क्योंकि कांग्रेस में उनके पास जरूरी समर्थन नहीं है। स्पीकर एदुआर्दो कुन्हा को बर्खास्त किया गया था जिसके बाद मारान्याओ पिछले हफ्ते ही स्पीकर बने।
कुन्हा जिल्मा रूसेफ के विरोधी रहे हैं और महाभियोग के लिए उन्होंने मोर्चा संभाला था। इस फैसले पर रूसेफ ने कहा कि आगे कड़ी लड़ाई लड़नी है।
जिल्मा रूसेफ और उनके समर्थक आरोप लगाते रहे हैं कि उनके खिलाफ तख्तापलट की कोशिश की जा रही है। रूसेफ पर 2014 में दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव में सरकारी खाते में हेराफेरी का आरोप है जिससे वो इनकार करती रही हैं।