तुर्की में एक अदालत ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल इल्कर बासबूग को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है।
2008 से 2010 के बीच तुर्की में सेना प्रमुख रहे बासबूग पर तख्तापलट की साज़िश रचने का आरोप है। ‘एर्गेनेकॉन’ नाम के इस षड्यंत्र केस को लेकर क़रीब 275 लोगों पर मुक़दमा चल रहा है।
इस मामले में अभियुक्त कुछ लोगों को 47 साल तक की सज़ा सुनाई है, जबकि 21 लोगों को रिहा कर दिया गया है।
मुक़दमे का सामना कर रहे लोगों के परिजनों ने अदालत के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर उन्हें वहां से हटा दिया।
एक ख़ास कमरे में यह अदालत चल रही है। जिन पर मुक़दमा चल रहा है उनमें पूर्व सेना प्रमुख, दूसरे कई अफ़सर, वकील, शिक्षाविद् और पत्रकार शामिल हैं। मुक़दमों की सुनवाई पांच साल से चल रही है।
प्रधानमंत्री की परीक्षा
माना जाता है कि एर्गेनेकॉन षड्यंत्र जस्टिस एंड डेवेलपमेंट (एके) पार्टी की सरकार को कथित तौर पर गिराने के लिए किया गया था। इन लोगों पर कई आरोप लगाए गए हैं।
इनमें एर्गेनेकॉन नाम के भूमिगत चरमपंथी संगठन के सदस्य होने से लेकर अवैध हथियार रखने और एकेपी के ख़िलाफ़ हथियारबंद विद्रोह करने के आरोप तक शामिल हैं।
अदालत तुर्की की राजधानी इस्तांबुल के पश्चिम में सिलिवरी जेल परिसर में चल रही है, जहां जनरल बासबूग को क़ैद करके रखा गया है।
इस केस को धर्मनिरपेक्षतावादियों और सैन्य विपक्षियों के ख़िलाफ़ प्रधानमंत्री रिसेप तैयप अर्दोआन की कड़ी परीक्षा माना जा रहा है। 2002 में अर्दोआन के सत्ता में आने के बाद से सैकड़ों पूर्व और मौजूदा सैन्य अधिकारियों की गिरफ़्तारी हुई हैं।
'ख़ामोश करने की कोशिश'
उधर आलोचकों का कहना है कि आरोपों के मुक़ाबले बहुत कम सबूत मौजूद हैं। उन्होंने इसे सरकार की अपने सेक्यूलरवादी विपक्षियों को ख़ामोश करने की कोशिश बताया है।
उनका यह भी कहना है कि जांच-पड़ताल में इस्लामी जड़ें रखने वाली एकेपी के विरोधियों को ही निशाना बनाया जा रहा है। जबकि सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है।
तुर्की की सेना हमेशा से देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान की रक्षक के बतौर देखी जाती रही है। लेकिन 1960 से 1980 के बीच देश में तीन बार तख्तापलट हुए और एकेपी के साथ उसके संबंध तनावपूर्ण हो गए।
एकेपी को वेल्फेयर पार्टी का उत्तराधिकारी माना जाता है, जिसने 1996-97 में सेना की मदद से सरकार गिरा दी थी।
क्या है एर्गेनेकॉन?
एर्गेनेकॉन उस संगठन का नाम है जिसमें कट्टर राष्ट्रवादी और धर्मनिरपेक्षतावादी शामिल बताए जाते हैं। माना जाता है कि इसके सेना के साथ बेहद गहरे ताल्लुकात थे और यह संगठन अपने इस्लामी आधार की वजह से एकेपी के ख़िलाफ़ रहा है। एर्गेनेकॉन को एकेपी सरकार को गिराने के लिए षड्यंत्र रचने का ज़िम्मेदार माना गया है।
एर्गेनेकॉन मामले की जांच 2007 में शुरू हुई जब एक पूर्व सेनाधिकारी के घर से विस्फोटकों का ज़ख़ीरा बरामद हुआ। इसके बाद पूरे मामले की गहराई से पड़ताल शुरू की गई और क़रीब 200 लोगों को गिरफ़्तार किया गया। इनमें कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल थे।
र्गेनेकॉन का मतलब मध्य एशिया की एक पौराणिक घाटी है, जिसे तुर्कों का मूल निवास स्थान माना जाता है।